![]() |
| पुलिस मुख्यालय में गिरफ्तार माओवादियों की जानकारी देते डीजीपी व अन्य। |
धनबाद पुलिस, गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन द्वारा चलाए गए एक संयुक्त अभियान में 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर को उसके चार अन्य सहयोगियों के साथ धर दबोचा है। इस कार्रवाई को झारखंड में 'रेड टेरर' के चैप्टर क्लोज कहा जा रहा है।
खुफिया इनपुट बना 'गेम चेंजर'
सुरक्षा एजेंसियों को एक सटीक और पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी कि कुख्यात माओवादी मिसिर बेसरा अपने कुछ चुनिंदा सहयोगियों के साथ एक टाटा मैजिक वाहन से धनबाद से गिरिडीह की ओर जा रहा है।
सूचना मिलते ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार और गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बिना देर किए एक संयुक्त ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की। इस पूरे हाई-प्रोफाइल अभियान की सीधी निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह और झारखंड पुलिस के आईजी (अभियान) नरेंद्र कुमार स्वयं कर रहे थे।
अभेद्य घेराबंदी, बच निकलने का नहीं मिला मौका
धनबाद-गिरिडीह सीमा पर सुरक्षा बलों ने पहले से ही एक मजबूत और अचूक घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही संदिग्ध टाटा मैजिक वाहन सीमा पर पहुंचा, मुस्तैद जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
जवानों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते नक्सलियों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला और बिना किसी गोलीबारी के शांतिपूर्ण ढंग से मिसिर बेसरा समेत पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
चलता-फिरता हथियारों का जखीरा बना वाहन
गिरफ्तारी के बाद जब सुरक्षा बलों ने टाटा मैजिक वाहन की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। वाहन के भीतर से भारी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। इनमें 3 अत्याधुनिक AK-47 राइफलें, कई ऑटोमैटिक मैगजीन व बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस शामिल हैं।
शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़े और सनसनीखेज माओवादी हमले को अंजाम देने के लिए किया जाना था।
झारखंड में चरमपंथी नेतृत्व को सबसे करारा झटका
मिसिर बेसरा पिछले लंबे समय से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों का सबसे प्रमुख और प्रभावशाली चेहरा रहा है। उसकी गिरफ्तारी से राज्य में प्रतिबंधित संगठन की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है।
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि पकड़े गए नक्सलियों से पूछताछ के बाद संगठन के शेष नेटवर्क, गुप्त ठिकानों, हथियारों के स्रोतों और फंडिंग चैनल्स से जुड़े कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।

एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.