GA4-314340326 मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ झारखंड में माओवाद का सबसे बड़ा किला ध्वस्त, जानिए दो करोड़ के इनामी उग्रवादी की करतूतें

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ झारखंड में माओवाद का सबसे बड़ा किला ध्वस्त, जानिए दो करोड़ के इनामी उग्रवादी की करतूतें

 

With the arrest of Misir Besra, the biggest Maoist stronghold in Jharkhand has collapsed.
पुलिस मुख्यालय में गिरफ्तार माओवादियों की जानकारी देते डीजीपी व अन्य।
गिरिडीह (novbhaskar): झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने सबसे बड़ी सफलता हासिल की है। दो दशकों से अधिक समय तक जंगलों में गोलियों, बारूदी सुरंगों और खूनी हमलों से दहशत का साम्राज्य चलाने वाला माओवादी नेटवर्क आखिरकार ध्वस्त हो गया है।

धनबाद पुलिस, गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन द्वारा चलाए गए एक संयुक्त अभियान में 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर को उसके चार अन्य सहयोगियों के साथ धर दबोचा है। इस कार्रवाई को झारखंड में 'रेड टेरर' के चैप्टर क्लोज कहा जा रहा है।

 खुफिया इनपुट बना 'गेम चेंजर'

सुरक्षा एजेंसियों को एक सटीक और पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी कि कुख्यात माओवादी मिसिर बेसरा अपने कुछ चुनिंदा सहयोगियों के साथ एक टाटा मैजिक वाहन से धनबाद से गिरिडीह की ओर जा रहा है।

सूचना मिलते ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार और गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बिना देर किए एक संयुक्त ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की। इस पूरे हाई-प्रोफाइल अभियान की सीधी निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह और झारखंड पुलिस के आईजी (अभियान) नरेंद्र कुमार स्वयं कर रहे थे।

अभेद्य घेराबंदी, बच निकलने का नहीं मिला मौका

धनबाद-गिरिडीह सीमा पर सुरक्षा बलों ने पहले से ही एक मजबूत और अचूक घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही संदिग्ध टाटा मैजिक वाहन सीमा पर पहुंचा, मुस्तैद जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।

जवानों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते नक्सलियों को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला और बिना किसी गोलीबारी के शांतिपूर्ण ढंग से मिसिर बेसरा समेत पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

चलता-फिरता हथियारों का जखीरा बना वाहन

गिरफ्तारी के बाद जब सुरक्षा बलों ने टाटा मैजिक वाहन की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। वाहन के भीतर से भारी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। इनमें 3 अत्याधुनिक AK-47 राइफलें, कई ऑटोमैटिक मैगजीन व बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस शामिल हैं।

शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़े और सनसनीखेज माओवादी हमले को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

झारखंड में चरमपंथी नेतृत्व को सबसे करारा झटका

मिसिर बेसरा पिछले लंबे समय से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों का सबसे प्रमुख और प्रभावशाली चेहरा रहा है। उसकी गिरफ्तारी से राज्य में प्रतिबंधित संगठन की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि पकड़े गए नक्सलियों से पूछताछ के बाद संगठन के शेष नेटवर्क, गुप्त ठिकानों, हथियारों के स्रोतों और फंडिंग चैनल्स से जुड़े कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।

150 से अधिक अपराधिक मामलों में थी तलाश

मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों में 150 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जानिए उसके बड़े 
अपराधों को...

आईईडी ब्लास्ट कर 55 जवानों की ले ली थी जान

 वर्ष 2003-2004 में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के बिटकिलसोय और बलिबा जंगलों में सुरक्षा बलों को लक्षित कर किए गए भीषण आईईडी (IED) विस्फोटों की योजना बनाने में मिसिर बेसरा मुख्य रणनीतिकारों में शामिल था। इन हमलों में कुल 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इन घटनाओं के बाद ही वह माओवादी संगठन के केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) और शीर्ष नेतृत्व के करीब आया था।

लखीसराय कोर्ट से मिसिर को छुड़ कर ले गए थे साथी

 वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय सिविल कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान मिसिर बेसरा को पुलिस हिरासत से मुक्त कराने के लिए लगभग 50 हथियारबंद माओवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और बमबारी की थी। इस दुस्साहसिक हमले के बाद नक्सली उसे पुलिस चंगुल से छुड़ाकर फरार होने में कामयाब रहे थे। इस मामले में कबेया थाने में मुख्य प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

 जहानाबाद जेल ब्रेक कांड कनेक्शन

 वर्ष 2005 में बिहार के जहानाबाद जेल पर हुए ऐतिहासिक और बेहद कुख्यात नक्सली हमले के मास्टरमाइंड गिरोह और रणनीतिक योजना में भी मिसिर बेसरा की सक्रिय संलिप्तता रही है। इस बड़े हमले में सैकड़ों कैदियों को छुड़ाया गया था तथा पुलिस हथियारों की भारी लूट की गई थी।

पुलिस कर्मियों का अपहरण और हत्या 

 बिहार के कजरा और चानन के जंगलों में सक्रियता के दौरान पुलिसकर्मियों के अपहरण तथा बाद में सुरक्षाकर्मियों की निर्मम हत्या की वारदातों में भी उसका नाम मुख्य रूप से जुड़ा रहा है। इसके अलावा, संगठन के आंतरिक गुटों (जैसे आदिवासी और यादव गुटों) के बीच समन्वय स्थापित कर संगठन को पूर्वी क्षेत्रों में हिंसा फैलाने के लिएजमीनी स्तर पर मजबूत करने का मुख्य जिम्मा भी उसी के पास था।
देश के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों के अलावा लेवी वसूली, रेलवे व सड़क निर्माण कार्यों में आगजनी, और पुलिस के खिलाफ गुरिल्ला वार की दर्जनों वारदातों में पुलिस को लंबे समय से मिसिर बेसरा की तलाश थी।







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