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| आग बुझाने की कोशिश करते लोग व लगी भीड़। |
जिंदा जल गए चालक और उपचालक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह एक गुड़ लदा 16 चक्का ट्रेलर, एक आयशर वाहन और कोयला लदा 18 चक्का ट्रक आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि देखते ही देखते तीनों वाहनों ने आग का गोला रूप ले लिया। वाहनों के केबिन में फंसे साहिल (24 वर्ष, पिता नासिफ अहमद) और मोहम्मद रशीद (21 वर्ष, पिता भूरे खां) को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों की जिंदा जलने से मौत हो गई। दोनों मृतक उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले थे।
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा, प्रशासन पर भड़के लोग
हादसे के बाद दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में हुई देरी से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का आरोप है कि सूचना के डेढ़ घंटे बाद तक फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची। इस बीच, स्थानीय ग्रामीणों और डीबीएल के टैंकरों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। काफी मशक्कत के बाद एक वाहन की आग पर आंशिक नियंत्रण पाया जा सका।
अवैध पार्किंग बनी काल
ग्रामीणों ने हाईवे किनारे होटलों के पास बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों को हादसे का मुख्य कारण बताया है। उनका कहना है कि अवैध पार्किंग की वजह से सड़क संकरी हो जाती है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
स्थायी फायर स्टेशन : डुमरी में तत्काल एक स्थायी अग्निशमन केंद्र की स्थापना हो।
अवैध पार्किंग पर रोक : हाईवे किनारे होटलों के पास खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानक : राहत और बचाव कार्यों के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
विडंबना : एक तरफ 'अग्निशमन सप्ताह', दूसरी तरफ घंटों देर से पहुंची दमकल
हैरानी की बात यह है कि गिरिडीह जिले में 14 से 20 अप्रैल तक "अग्निशमन सेवा सप्ताह" मनाया जा रहा है। विभाग की टीमें कार्यालयों और बाजारों में जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं, लेकिन धरातल पर आपातकालीन स्थिति में विभाग की सुस्ती ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। हर व्यक्ति को अग्निशमन यंत्र के उपयोग की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। -रवि रंजन, अग्निशमन पदाधिकारी (जागरूकता अभियान के दौरान)

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