अनगड़ा (रांची) : विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें स्वास्थ्य अनुसंधान की व्यावहारिक बारीकियों से रूबरू कराने के उद्देश्य से मंगलवार को 'मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट' (MRHRU), अनगड़ा द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन ICMR SHINE अंगड़ा स्थित एसएस +2 उच्च विद्यालय, चिलदाग में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च' (NIMR) की फील्ड यूनिट रांची के अंतर्गत संचालित माइक्रस्कोप में देखती एक छात्रा
पहचान से लेकर निष्कर्ष तक की समझी प्रक्रिया
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के समक्ष वैज्ञानिकों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। छात्रों को विस्तार से बताया गया कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की पहचान करने से लेकर डेटा संग्रह, गहन अध्ययन और अंततः निष्कर्ष तक पहुंचने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया किस तरह काम करती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान के महत्व पर जोर
MRHRU अंगड़ा द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे जनसंख्या-आधारित (Population-based) अनुसंधानों की जानकारी देते हुए छात्रों को समझाया गया कि गांवों में किए जाने वाले शोध क्यों आवश्यक हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे अध्ययनों से स्थानीय स्तर पर बीमारियों और उनके जोखिम कारकों की सटीक पहचान होती है। समुदाय की वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलती है। शोध से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग बेहतर स्वास्थ्य नीतियां और प्रभावी योजनाएं बनाने में किया जाता है।
ICMR महानिदेशक का संदेश और छात्रों का उत्साह
इस अवसर पर ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल का एक विशेष वीडियो संदेश भी विद्यार्थियों को दिखाया गया। अपने संदेश में उन्होंने विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में देश के युवाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने गहरा उत्साह दिखाया और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। राष्ट्रीय स्तर की आगामी प्रतियोगिताओं में भाग लेने को लेकर भी विद्यार्थियों में खास रुचि देखी गई। इस आयोजन ने छात्रों को विज्ञान को किताबों से बाहर निकालकर समाज और समुदाय की जमीनी समस्याओं के समाधान से जोड़ने की नई प्रेरणा दी।
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