गिरिडीह (#novbhaskar): झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल (CGL) परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच का दायरा अब फैलता दोनों दिख रहा है। गुरुवार सुबह CID की एक विशेष टीम ने गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना अंतर्गत बदवारा पंचायत के हाथबोर गांव में दबिश दी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, CID ने गांव के पारा शिक्षक विकास पांडेय को अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ रांची ले गई।
अभय तिवारी से जुड़ा है कनेक्शन
विकास पांडेय का संबंध इस बहुचर्चित मामले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी के परिवार से है। बताया जा रहा है कि विकास पांडेय, अभय तिवारी के ससुर हैं। पेपर लीक कांड की कड़ियों को आपस में जोड़ने और वित्तीय व संलिप्तता के साक्ष्यों को खंगालने के क्रम में CID ने यह अहम कदम उठाया है।
बेंगाबाद थाना प्रभारी ने विकास पांडेय को पूछताछ के लिए रांची ले जाए जाने की पुष्टि की है। हालांकि, उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या इस मामले में उनकी क्या और कितनी संलिप्तता है, इस पर आधिकारिक बयान का इंतजार है। CID की इस कार्रवाई से बेंगाबाद से लेकर पूरे गिरिडीह जिले के शैक्षणिक हलकों में हड़कंप मच गया है। फिलहाल, पूरे झारखंड की निगाहें CID की इस ताबड़तोड़ जांच और उसके आगामी आधिकारिक खुलासों पर टिकी हुई हैं।
राजधानी में 13वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आक्रोश
एक तरफ जहां CID इस मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी रांची में अभ्यर्थी आंदोलन चला रहे हैं। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित धांधली, भ्रष्टाचार और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का बेमियादी आंदोलन 13वें दिन भी लगातार जारी है। भारी वर्षा और तमाम प्रशासनिक दबाव के बावजूद छात्र अपनी मांगों पर पूरी तरह डटे हुए हैं।
छात्रों की ये हैं प्रमुख मांगें
* पेपर लीक और धांधली की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो।
* दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
* भविष्य की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
जानिए कौन है अभय तिवारी
अभय कुमार तिवारी या अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी को झारखंड में बहुचर्चित जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षा के पेपर लीक व धांधली मामले का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
CID के अनुसार, अभय तिवारी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर 'सेटिंग-गेटिंग' और पेपर लीक करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार रहा है। वह परीक्षा आयोजित करने वाली एक विवादित एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर रह चुका है।
जांच में यह बात सामने आई है कि अभय खुद गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (Block Supply Officer) के पद पर कार्यरत था। इसके अलावा, उसने पिछले 13 वर्षों में दारोगा, नेवी (SSR), BARC, सीआरपीएफ, एनCएल (NCL), जेएसएससी (पीजीटी, सीजीएल) और जेपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाओं समेत करीब 12 प्रतियोगी प्रतियोगिता परीक्षाएं पास की हैं।
अपने परिवार में कई लोगों को दिला चुका है नौकरी
CID जांच के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए उसने न केवल खुद कई नौकरियां हासिल कीं, बल्कि अपने परिवार के अन्य सदस्यों (जैसे भाई और पत्नी आदि) को भी कथित तौर पर बैकडोर से सरकारी नौकरियां दिलाई हैं।
झारखंड में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर चल रहे भारी छात्र आंदोलन के बीच CID ने उसके ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल सबूत, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, ब्लैंक चेक और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। इस मामले में उसके पारिवारिक संबंधों और संपर्कों की भी लगातार जांच की जा रही है।

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