सिल्ली (रांची) : सिल्ली-बुंडू मार्ग पर स्थित एचपी प्रमोद फ्यूल स्टेशन इन दिनों नियमों की धज्जियां उड़ाने और ग्राहकों से अवैध वसूली को लेकर चर्चा में है। पंप परिसर में स्पष्ट रूप से चेतावनी बोर्ड लगा है कि प्लास्टिक केन या बोतल में पेट्रोल-डीजल देना सख्त मना है। लेकिन धरातल पर नजारा इसके बिल्कुल विपरीत है। पंप संचालक खुद परिसर में प्लास्टिक केन रखकर खुलेआम पेट्रोल-डीजल बेच रहे हैं और इसके एवज में ग्राहकों से अवैध 'केन किराया' या 'सर्विस चार्ज' के नाम पर वसूली कर रहे हैं।
सुरक्षा नियमों से खिलवाड़ और 20 रुपये की अवैध वसूली
गुरुवार को पंप पर उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब प्लास्टिक केन में तेल भरवाने पहुंचे एक ग्राहक से पंप कर्मियों ने 20 रुपये अतिरिक्त चार्ज वसूल लिया। नियमानुसार किसी भी प्रकार का केन भाड़ा लेना पूरी तरह गैरकानूनी है। जब वहां मौजूद पत्रकार ने इस अवैध वसूली पर सवाल उठाया, तो पंप कर्मी ने लीपापोती करते हुए कहा कि पहले 20 रुपये लेते थे, लेकिन कल शाम से बंद कर दिया है।
पंप कर्मी का यह झूठ तुरंत बेनकाब हो गया, क्योंकि ठीक उसी समय 20 रुपये भाड़ा देकर तेल भरा चुके एक ग्राहक ने मौके पर ही अपनी रकम वापस मांगी। जब कर्मी ने पैसे लौटाने से इनकार किया, तो ग्राहक ने खुद टेबल से अपने 20 रुपये वापस उठा लिए। स्थानीय ग्राहकों का आरोप है कि बीते कई दिनों से केन के किराए या सर्विस चार्ज के नाम पर प्रति ग्राहक 20 से 50 रुपये तक की अवैध उगाही की जा रही है।
सुरक्षा को ताक पर रखकर खुली कालाबाजारी
पेट्रोलियम सुरक्षा मानकों के अनुसार, पेट्रोल एक अत्यधिक वाष्पशील पदार्थ है। प्लास्टिक के बर्तनों में तेल भरते समय स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी (स्थैतिक बिजली) उत्पन्न होती है, जिससे स्पार्क होकर भीषण आग लग सकती है। इसके अलावा प्लास्टिक गलने या लीक होने का खतरा भी बना रहता है।
तमाम खतरों और आधिकारिक प्रतिबंधों के बावजूद, महज 20 रुपये का अतिरिक्त किराया लेकर परिसर में ही प्लास्टिक केन में तेल देना न केवल एक गंभीर सुरक्षा लापरवाही है, बल्कि खुलेआम कालाबाजारी का जीता-जागता प्रमाण भी है।
व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर उठते गंभीर सवाल
गौरतलब है कि हाल ही में सिल्ली स्थित इंडियन ऑयल के 'M/s चंद्रा एंटरप्राइजेज' पर भी भाड़े की केन में मिलावटी तेल बेचने को लेकर ग्राहकों ने भारी हंगामा किया था। उस घटना से सबक लेने के बजाय क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर नियमों का उल्लंघन और अवैध वसूली का खेल बदस्तूर जारी है।
सवाल उठता है कि जब नो-पार्रकर और नो-प्लास्टिक के नियम बोर्ड तक ही सीमित हैं, तो जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग मौन क्यों है? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे या जनता के बड़े आक्रोश का इंतजार कर रहा है? स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से इस अवैध वसूली और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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