GA4-314340326 पतराहातु में सरहुल मिलन की धूम: साल वृक्ष में विराजती हैं सरना मां, प्रकृति की रक्षा का लिया संकल्प

पतराहातु में सरहुल मिलन की धूम: साल वृक्ष में विराजती हैं सरना मां, प्रकृति की रक्षा का लिया संकल्प

Celebration of Sarhul Milan in Patrahatu: Sarna Maa resides in the Sal tree, pledge taken to protect nature
कार्यक्रम में मंच पर बैठे अतिथि।
सिल्ली (रांची) : झारखंड का महापर्व सरहुल पतराहातु में पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। आदिवासी सरना समाज, सिल्ली द्वारा आयोजित इस मिलन समारोह में जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश गूंजा। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रकृति की आराधना की।

पाहन ने की पूजा, चढ़ाया चावल-हड़िया का भोग

पतराहातु स्कूल मैदान में आयोजित इस समारोह में पाहन लक्ष्मण सिंह मुंडा, दिलीप मुंडा, रामनाथ मुंडा और मंगल मुंडा ने पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखा। विधि-विधान से साल (सखुआ) के वृक्ष की पूजा की गई और धरती मां को खुश करने के लिए अरवा चावल, मुर्गा और हड़िया का भोग लगाया गया। पाहन ने इस अवसर पर सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की भविष्यवाणी भी की।

'साल का पेड़ काटना पाप है'

समारोह को संबोधित करते हुए आदिवासी नेता प्रेमशाही मुंडा ने प्रकृति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी दर्शन में साल के पेड़ का विशेष स्थान है, क्योंकि इसमें सरना मां का वास होता है। हम पेड़ की पूजा करते हैं, उसे काटना हमारे समाज में पाप माना जाता है। सरहुल हमें सिखाता है कि जब तक प्रकृति सुरक्षित है, तभी तक हम सुरक्षित हैं।

Celebration of Sarhul Milan in Patrahatu: Sarna Maa resides in the Sal tree, pledge taken to protect nature
पारंपरिक परिधानों में नृत्य करते लोग।

मांदर की थाप पर थिरके कदम

पूजा संपन्न होने के बाद मैदान सांस्कृतिक उत्सव के रंग में रंग गया। मांदर की थाप और नगाड़ों की गूंज पर क्या बच्चे, क्या बूढ़े, सभी ने हाथ से हाथ जोड़कर गोल घेरा बनाया और पारंपरिक नृत्य किया। 'जय सरना' के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

संगठन की रही सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम की सफलता में अध्यक्ष समुंदर सिंह मुंडा, सचिव विश्वनाथ सिंह, कोषाध्यक्ष निपेन सिंह मुंडा और युवा अध्यक्ष रांगा सिंह मुंडा की मुख्य भूमिका रही। मौके पर राम रतन सिंह मुंडा, मुंचीराम मांझी, संतोष मुंडा, हेमंत मुंडा, वोध मुंडा, पंचानन सिंह, सिदाम मुंडा, नवलकिशोर सिंह मुंडा समेत सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।


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