बोले- जमीन वाले दरी बिछाएं और मलाई डॉक्टर खाएं
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| मीडिया से बात करते नागेश्वर दास। |
'व्यवसायी' को तरजीह, कार्यकर्ता को नजरअंदाज
नागेश्वर दास ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, भाजपा अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। सालों तक जमीन पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे व्यक्ति (डॉ. शैलेंद्र प्रसाद चौधरी) को समर्थन दिया गया है, जो मूल रूप से व्यवसायी हैं। पार्टी अब कैडर के बजाय रसूख को तवज्जो दे रही है।
फिर तो रिम्स के डॉक्टर को बना दें मुख्यमंत्री
अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए दास ने तंज कसा। कहा-अगर पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत की कद्र नहीं है, तो जब झारखंड में भाजपा की सरकार बनेगी, तब रिम्स के किसी डॉक्टर को ही मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। पसीना कार्यकर्ता बहाते हैं और इनाम बाहरी लोगों को मिलता है।"
जबरन समर्थन दिलवाने का भी आरोप
नागेश्वर दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने उन पर भारी दबाव बनाया और जबरदस्ती दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन का ऐलान करवाया था।
इन दिग्गजों की सिफारिश भी हुई फेल
नागेश्वर दास के मुताबिक, उनके नाम की सिफारिश पूर्व विधायक निर्भय शाहबादी, पूर्व चेयरमैन दिनेश यादव, सुरेश साहू व विनीता कुमारी (महिला नेत्री) ने की थी। इसके बावजूद, पार्टी हाईकमान और वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा डॉ. शैलेंद्र को हरी झंडी दिए जाने से अब पार्टी में अंदरूनी कलह सड़क पर आ गई है।
भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं
चुनाव से ठीक पहले नागेश्वर दास का बागी होकर मैदान में डटे रहना भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। यह इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह उन कार्यकर्ताओं के गुस्से का प्रतीक है जो 'पैराशूट लैंडिंग' से आहत हैं।

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