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| हिनू स्थित ईडी कार्यालय (फाइल फोटो) |
क्या है मामला
रांची पुलिस की यह पूरी कार्रवाई मारपीट के एक मामले से जुड़ी है। दरअसल, पेयजल विभाग के एक पूर्व अनुबंध कर्मी (क्लर्क) संतोष कुमार ने रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। संतोष कुमार का आरोप है कि पूछताछ के दौरान ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम ने उसके साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
संतोष कुमार पर खुद 23 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है और इस मामले में ईडी पहले उसे जेल भी भेज चुकी है।
डीएसपी संजीव मिश्रा के नेतृत्व में चल रहा सर्च
गुरुवार सुबह डीसीपी संजीव मिश्रा के नेतृत्व में रांची पुलिस की एक टीम हिनू स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंची। पुलिस की टीम कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि मारपीट के आरोपों की सत्यता की जांच की जा सके बताया जा रहा है कि पुलिस इस मामले में संबंधित ईडी अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है।
कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जैसे ही रांची पुलिस ईडी दफ्तर पहुंची, वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई। एहतियात के तौर पर ईडी कार्यालय की सुरक्षा को अचानक बढ़ा दिया गया है। ईडी दफ्तर के बाहर और अंदर CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात कर दिया गया है। कार्यालय के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा उपकरणों के साथ जवानों की मुस्तैदी देखी जा रही है।
भाजपा ने लगाया सबूत नष्ट करने का आरोप
इस कार्रवाई पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि पुलिस की इस 'छापेमारी' की आड़ में मुख्यमंत्री और अन्य घोटालों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ईडी कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि झारखंड को बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा।

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