GA4-314340326 रांची में ईडी के दफ्तर पर रांची पुलिस की छापेमारी

रांची में ईडी के दफ्तर पर रांची पुलिस की छापेमारी

हिनू स्थित ईडी कार्यालय (फाइल फोटो)
 रांची:  आज (15 जनवरी, 2026) सुबह एक बेहद चौंकाने वाला और दुर्लभ घटनाक्रम देखने को मिला। आमतौर पर छापेमारी करनेवाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में ही रांची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद ईडी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और वहां भारी गहमागहमी का माहौल है।

क्या है मामला 

रांची पुलिस की यह पूरी कार्रवाई मारपीट के एक मामले से जुड़ी है। दरअसल, पेयजल विभाग के एक पूर्व अनुबंध कर्मी (क्लर्क) संतोष कुमार ने रांची के एयरपोर्ट थाने में ईडी के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। संतोष कुमार का आरोप है कि पूछताछ के दौरान ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम ने उसके साथ मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

  संतोष कुमार पर खुद 23 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है और इस मामले में ईडी पहले उसे जेल भी भेज चुकी है।

डीएसपी संजीव मिश्रा के नेतृत्व में चल रहा सर्च

गुरुवार सुबह डीसीपी संजीव मिश्रा के नेतृत्व में रांची पुलिस की एक टीम हिनू स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंची। पुलिस की टीम कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि मारपीट के आरोपों की सत्यता की जांच की जा सके बताया जा रहा है कि पुलिस इस मामले में संबंधित ईडी अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है।

कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जैसे ही रांची पुलिस ईडी दफ्तर पहुंची, वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई। एहतियात के तौर पर ईडी कार्यालय की सुरक्षा को अचानक बढ़ा दिया गया है। ईडी दफ्तर के बाहर और अंदर CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात कर दिया गया है। कार्यालय के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा उपकरणों के साथ जवानों की मुस्तैदी देखी जा रही है।

भाजपा ने लगाया सबूत नष्ट करने का आरोप

इस कार्रवाई पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि पुलिस की इस 'छापेमारी' की आड़ में मुख्यमंत्री और अन्य घोटालों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ईडी कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि झारखंड को बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा।

कुछ दिनों पहले कोलकाता में भी दिखा था ऐसा दृश्य

​झारखंड जैसी ही स्थिति पिछले हफ्ते कोलकाता में देखी गई, जो अब और भी गंभीर हो गई है। बंगाल सरकार और ईडी दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं और कैविएट दाखिल किए हैं। ईडी ने ममता बनर्जी और पुलिस कमिश्नर के खिलाफ CBI जांच की मांग की है। बताते चलें कि ईडी ने कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में टीएमसी के चुनावी रणनीतिकार संस्थान I-PAC और उसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं। ईडी का गंभीर आरोप है कि ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और मौके से 'हरे रंग की एक फाइल'हार्ड डिस्क जबरन अपने साथ ले गईं। ईडी ने कोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री ने अपराधिक तरीके से सबूतों की चोरी की है।





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