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| पोस्टमार्टम रूम के बाहर खड़े शोकाकुल परिजन। |
हादसे ने छीनी घर की खुशियां
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, चारा बश्के के पुत्र बबलू बश्के तीन दिन पूर्व एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वर्तमान में वह धनबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती है और कोमा में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।
इलाज का खर्च बना मौत का कारण
बताया जा रहा है कि अस्पताल में इलाज के दौरान भारी खर्च आ रहा था। चारा बश्के की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी और वह बेटे के इलाज के लिए पैसों का इंतजाम नहीं कर पा रहे थे। कोमा में पड़े बेटे की स्थिति और बढ़ते कर्ज के बोझ ने उन्हें गहरे मानसिक तनाव (डिप्रेशन) में डाल दिया था। इसी बेबसी के चलते उन्होंने गुरुवार को मौत को गले लगा लिया। घटना की सूचना मिलते ही पीरटांड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का प्रतीत होता है, फिर भी पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

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