angara(ranchi) सिरका पंचायत के गांधीग्राम में शनिवार को किसान गोष्ठी हुआ। इसका आयोजन इफको ने किया। इसमें 80 किसानों को तरबूज की खेती को वैज्ञानिक तरीके से करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण चन्दन कुमार फील्ड मैनेजर इफ्फको रांची ने दिया। किसानों को बताया गया कि तरबूज का नर्सरी दिसंबर के प्रथम पखवाड़े में करना है। नर्सरी में तरबूज के बीज को बेड में गिराने से पहले इफको के नैनो डीएपी तरल, नैनो जिंक एवं नैनो कॉपर से शोधन करें। ऐसा करने से बीज को आरंभ में ही भोजन मिल जाता है और यह अपने अंकुरण के बाद ही नैनो रूप में उपलब्ध खाने को अपने जड़ के विकास में लगाता है जिससे जड़ों का त्वरित गति से विकास होता है जो समय से मजबूत पौध को तैयार करने में सहायक होता है। तरबूज एक बहु तोड़ाई फ़सल है जो काफी बड़ा एवं रसदार भी होता है साथ ही इसके गुदा को मीठा एवं कड़कदार बनाना भी एक महत्वपूर्ण भाग होता है जो कि इसके अच्छे बाजार मूल्य को निर्धारण करने में एवं लंबी अवधि तक टिकाऊ बनाए रखने के लिये सहायक होता है। ऐसे में तरबूज की रोपाई करने के समय मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में गोबर का खाद का प्रयोग करना चाहिए जब फ़सल 30-35 दिन का हो जाए तो निकाय गुडाई करें तो उस समय मिट्टी में यूरिया देने की जगह कैल्शियम नाइट्रेट का भुरकाव करें और दानेदार यूरिया की जगह पर नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग पत्तियों में स्प्रे करें I पुनः फूल निकलने के समय इसका पत्तियों में सल्फेट ऑफ पोटाश के साथ मिलाकर स्प्रे करें। ऐसा करने से अधिक फूल लगते है तथा फल वजनदार, रसदार और कड़कदार के साथ लंबे समय तक तरोताजा बना रहता है। फसलों में फूल और फल के लगने की अवधि को अधिक लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इनका स्प्रे पत्तियों में 10 से 15 दिनों के अंतराल में करते रहना चाहिए। इस अवसर पर इफको के कुलदीप, अमरजीत अमर सहित अन्य उपस्थित थे।
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