GA4-314340326 रिनपास में शताब्दी वर्ष समारोह के नाम पर करोड़ों खर्च कर कराया गया भवनों का जीर्णोद्धार, एक साल बाद भी नहीं हो रहा इन भवनों का उपयोग

रिनपास में शताब्दी वर्ष समारोह के नाम पर करोड़ों खर्च कर कराया गया भवनों का जीर्णोद्धार, एक साल बाद भी नहीं हो रहा इन भवनों का उपयोग

फोटो: जीर्णोद्धार के बाद अनुपयोगी पड़ी रिनपास की लाल कोठी। KANKE NEWS, (RANCHI)। राजधानी रांची के कांके में स्थित रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) ने गत वर्ष चार सितंबर 2025 को अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर को ऐतिहासिक बनाने के नाम पर जम कर लूट और कमिशन का खेल हुआ। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में तत्कालीन प्रधान सचिव स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर रिनपास के विभिन्न भवनों के उन्नयन एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए तकनीकी अनुमोदन का प्राक्कलन कार्यपालक अभियंता कार्यालय, भवन निर्माण विभाग, भवन प्रमंडल एक के द्वारा तैयार किया गया। इसमें लगभग 37 भवनों, वार्ड, गेस्ट हाउस, टेक्निकल ब्लॉक, टीचिंग ब्लॉक, लाल कोठी,धर्मशाला, हॉफ वे होम, प्रशासनिक भवन आदि के 37 कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इनपर लगभग 35 करोड़ खर्च किया जाना था। दिलचस्प बात यह है कि जिस कार्य को रिनपास की वर्क्स कमिटी को अपनी संस्तुति देनी थी, उसको सीधे स्वास्थ्य विभाग ने तैयार करवाया। इसमें कुछ ऐसे भवनों के उन्नयन एवं जीर्णोद्धार का निर्णय भी लिया गया जो विगत एक- दो दशक से किसी उपयोग में ही नहीं हैं। इनमें 14 साल पहले आठ करोड़ में निर्मित होकर बंद पड़ा टेक्निकल ब्लाक तथा 19 साल से वीरान पड़ा निदेशक आवास लाल कोठी भी शामिल हैं। *शार्ट टर्म टेंडर निकाल किया गया कार्य* : चार सितंबर 2025 की तैयारियों के लिए जीर्णोद्धार एवं उन्नयन के कार्य के लिए 28 से 31 दिसंबर 2024 के बीच इन सभी कार्यों का टेंडर निकाला गया था। यह सभी शॉर्ट टर्म टेंडर के रूप में विज्ञापित किए गए थे। इनकी निविदा जनवरी माह में प्रकाशित की गई तथा इसी माह निविदाएं भी खोली गईं। इन कार्यों को दो से तीन माह में पूरा करने की अवधि निर्धारित की गई थी। टेंडर को भरने के लिए महज एक सप्ताह का समय दिया गया था। जानकारों के अनुसार प्रायः इमरजेंसी प्रकृति के कार्यों को ही शार्ट टर्म टेंडर से कराया जाता है। जबकि टेंडर प्रकाशन के समय संस्थान और विभाग के पास लगभग आठ माह का पर्याप्त समय उपलब्ध था। *आठ करोड़ में बने भवन का आठ करोड़ खर्च कर किया गया जीर्णोद्धार व उन्नयन :* वर्ष 2012 में आठ करोड़ की लागत से रिनपास के भीतर टेक्निकल ब्लाक की नींव पड़ी थी। निर्माण के बाद से आज 14 साल बाद तक इस भवन का एक दिन भी उपयोग नहीं हुआ है। इस बंद पड़े भवन के जीर्णोद्धार एवं उन्नयन पर लगभग तीन करोड़ खर्च किया गया। लेकिन यह आज भी बंद पड़ा हुआ है। जबकि इसके ऑडिटोरियम के साज सज्जा एवं उन्नयन पर पांच करोड़ की राशि खर्च की गई है। यानी आठ करोड़ की लागत से जिस नए भवन का निर्माण हुआ था, उसका बिना एक दिन उपयोग किए ही और आठ करोड़ खर्च कर जीर्णोद्धार एवं उन्नयन कर दिया गया। चार सितंबर को इसका 101 वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा, लेकिन यहां आज भी ताला लटका पड़ा है। यह स्वास्थ्य विभाग और रिनपास प्रशासन की कमाई के मंशा को उजागर करने के लिए शायद काफी है। 19 साल से बंद लाल कोठी पर खर्चे गए 90 लाख : लाल कोठी रिनपास निदेशक का सरकारी आवास है। यह वर्ष 2007 के जुलाई माह से बिल्कुल वीरान पड़ा है। दरअसल सरकार रिनपास के लिए एक अदद स्थाई निदेशक भी नहीं ढूंढ पाई है। इस कारण यहां रहने कोई आया ही नहीं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने पूरी उदारता दिखाते हुए शताब्दी वर्ष में इसकी सूरत बदलने में 90 लाख खर्च कर डाले। इसके बाद भी यह बंद पड़ा है। वहीं 2007 में 24 लाख में निर्मित कम्युनिटी हाल का एक करोड़ 32 लाख में उन्नयन व जीर्णोद्धार किया गया है। फिलहाल इसका उपयोग राजनीतिक दलों की बैठकों, सम्मेलनों, सामाजिक कार्यक्रमों, विवाह आदि के लिए किया जा रहा है। दोनों हाथों से खुलकर स्वास्थ्य विभाग ने रिनपास के शताब्दी वर्ष समारोह के नाम पर सरकारी राशि खर्च किया है। कुछ साल पहले जिन भवनों का जीर्णोद्धार हुआ था, उनको भी चकाचक कर दिया गया। इनमें धर्मशाला, पुरुष और महिला हॉफ वे होम, गेस्ट हाउस के अलावे सभी पुरुष और महिला वार्डों शामिल हैं। जानकार बताते हैं कि काफी पुराने इन भवनों के उन्नयन और जीर्णोद्धार पर जितनी राशि खर्च की गई है उससे कहीं कम में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आधुनिक सुविधायुक्त ने वार्ड बनाए जा सकते थे। एक ओर जहां राज्य के कई विभागों में कार्य करने वाले संविदाकर्मियों एवं आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत सरकारी कार्यालयों में कार्य करने वालों को आठ से 10 माह से वेतन के लाले पड़े हैं, इस राशि का उपयोग ज्यादा सकारात्मक एवं उपयोगी जगहों पर हो सकता था। खैर इस सरकारी राशि की फिजूलखर्ची पर स्वास्थ्य मंत्री, विभागीय सचिव तथा रिनपास के प्रभारी निदेशक से इस विषय पर सवाल तो केवल सीएम साहब ही पूछ सकते हैं,लेकिन ये कृत्य निःसंदेह सरकारी धन के दुरुपयोग तथा मनमाने आचरण का प्रमाण हैं, जो बताता है कि आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने रिनपास को स्वायत्तशासी बनाने का आदेश अधिकारियों को ऐसी ही लालफीताशाही से मुक्ति के लिए दिया था। लेकिन आज अधिकारियों ने उस आदेश को ही धत्ता बताते हुए रिनपास की स्वायत्तता को ही समाप्त कर दिया है। दरअसल संस्थान में स्वीकृत 810 पदों में से केवल 132 कर्मी और अधिकारी ही संस्थान में बचे हैं। इन खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की जगह स्वास्थ विभाग और रिनपास प्रशासन केवल निर्माण, जीर्णोद्धार और उन्नयन में पैसा और ऊर्जा खर्च कर रहा है।

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