संजय / डकरा (रांची) : आसमान से गिरती वर्षा की बूंदे और जमीन से निकलता जहरीला धुआं CCL की केडीएच कोयला खदान के आसपास रहनेवाली आबादी का जीना मुहाल कर दिया है। बुधवार सुबह खदान के समीप स्थित दामोदर गंझू के घर से लगभग 15 मीटर की दूरी पर अचानक जमीन धंस गई और एक बड़ा गोफ बन गया। जिसमें से लगातार निकल रही जहरीली गैसों और घने धुएं ने पूरी बस्ती को खोफ की साए में धकेल दिया है।
गोफ से लगातार निकल रहा जहरीला धुआं।
सांसों पर भारी पड़ी CCL प्रबंधन की लापरवाही
खदान के आग प्रभावित हिस्सों से उठ रहे धुएं ने पूरे क्षेत्र की हवा को जहरीला बना दिया है। जिससे यहां रहनेवालों का दम घुट रहा है। आंखों में जलन के साथ ही सांस लेने में परेशानी हो रही है। यहां रहनेवाले दामोदर गंझू ने बताया कि जहरीले धुएं की घुटन के कारण बस्ती के लोग रात-रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। समझ में नहीं आ रहा कि हम वर्षा से बचें या जमीन से निकलती मौत से। क्षेत्र में लगातार हो रहे भू-धसान ने हमलोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
10 साल से अटका इंसाफ, दांव पर लगी जिंदगियां
मामला सिर्फ पर्यावरण की तबाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह CCL प्रबंधन की वादाखिलाफी का भी उदाहरण है। वर्ष 2016 में खदान विस्तारीकरण के नाम पर दामोदर गंझू की 13.99 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। शर्त के मुताबिक सात लोगों को नौकरी मिलनी थी, इनमें से छह को तो मौकरी मिल गई, लेकिन एक व्यक्ति की नौकरी और मुआवाजे की फाइल आज 10 साल बाद भी आफिस की धूल फांक रही है। प्रबंधन की इस लेट-लतीफी और लापरवाही की कीमत पूरा परिवार अपनी जान को खतरे में डालकर चुका रहा है।
CCL से तत्काल गोफ भरने की मांग
बस्ती के रैयतों और दामोदर गंझू ने CCL प्रबंधन से तत्काल गोफ को भरने की मांग की है, ताकि खदान में लगी आग और जहरीले धुएं पर तत्काल काबू पाया जा सके। साथ ही, वर्षों से लंबित मुआवजे और नौकरी के मामले का तुरंत निपटारा करने की भी मांग की है। यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो खदान के मुहाने पर स्थित बस्ती के लोग किसी बड़ी दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं।
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