
सुदिव्य कुमार सोनू, नगर विकास मंत्री
गिरिडीह/तिसरी : तिसरी प्रखंड में शिक्षा के मंदिरों की जमीन अब भू-माफिया के निशाने पर है। सरकारी स्कूलों की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह उपायुक्त को पत्र लिखकर तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
झामुमो युवा मोर्चा ने खोली पोल
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब झामुमो युवा मोर्चा के तिसरी प्रखंड अध्यक्ष अफसर हुसैन ने मंत्री को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा। इसमें दो प्रमुख विद्यालयों की जमीन को हड़पे जाने का खुलासा किया गया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय भूरंगोडीह ग्रामीणों के दान की जमीन पर बना था। स्कूल का पुराना भवन ध्वस्त होते ही भू-माफिया ने जमीन पर कब्जा जमा लिया। उच्च विद्यालय तिसरी बरमसिया का भी यही हाल है। तत्कालीन बिहार सरकार के समय दान में मिली इस भूमि को भी साजिश के तहत हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकारी जमीन की हो रही लूट
सबसे चौंकाने वाला मामला 'उच्च विद्यालय तिसरी बरमसिया' का है। 18 अगस्त 2004 को मंत्रिपरिषद की बैठक में मोडीबीघा मौजा (खाता 02, प्लॉट 233) की 5 एकड़ सरकारी जमीन शिक्षा विभाग को हस्तांतरित की गई थी। विभागीय उदासीनता के कारण स्कूल की चहारदीवारी नहीं बन सकी और माफियाओं ने उस पर कब्जा कर लिया। आरोप है कि 28 फरवरी 2022 को जमीन मापी के आदेश के बावजूद अंचल के अमीन ने जानबूझकर मापी नहीं की, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
शिकायती पत्र में अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण ही माफिया आज स्कूलों की जमीन पर काबिज हैं। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के सख्त रुख और उपायुक्त के कड़े फॉरवर्डिंग नोट के बाद स्थानीय शिक्षा विभाग और अंचल कार्यालय में खलबली मची है।
डीईओ बोले- अतिक्रमण मुक्त कराएंगे
मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार ने कहा कि यदि विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण है, तो उसे हर हाल में अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। इस दिशा में कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। अब देखना यह है कि प्रशासन के निर्देश के बाद भू-माफियाओं पर कब तक शिकंजा कसता है और स्कूलों को कब तक उनकी जमीन वापस मिलती है।
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