अमित सहाय / गिरिडीह : नक्सल-विरोधी अभियान में गिरिडीह पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। भाकपा-माओवादी संगठन की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने मंगलवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने प्रेस वार्ता कर बताया कि अनिता के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में कुल 15 मामले दर्ज हैं। इनमें यूएपीए, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सीएलए एक्ट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। 
पुलिस के समक्ष सरेंडर करने के बाद माओवादी अनिता किस्कू उर्फ बबिता (बीच में)।
पुलिस के अनुसार संगठन के अंदर शोषण, लगातार पुलिस कार्रवाई और पति अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी के बाद अनिता का नक्सल संगठन से मोहभंग हो गया। इसके बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया।
सरकार देगी तीन लाख रुपए की सहायता
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ‘नई दिशा-एक नई पहल’ के तहत अनिता किस्कू को कुल 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें से 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता उसे सौंप दी गई है। शेष राशि नियमों के अनुसार दी जाएगी। इसके अलावा सरकार आवास, भोजन, सुरक्षा और पुनर्वास में भी मदद करेगी। न्यायालय में चल रहे मामलों के खर्च के लिए भी नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आत्मसमर्पण के बाद अनिता किस्कू ने नक्सलवाद को गलत रास्ता बताया और संगठन में सक्रिय अन्य लोगों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। एसपी ने कहा कि अनिता के आत्मसमर्पण से नक्सल-विरोधी अभियान को मजबूती मिलेगी और जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाके में निगरानी लगातार जारी रहेगी। साथ ही अब पुलिस का फोकस सिर्फ कार्रवाई पर नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण और पुनर्वास पर भी रहेगा ताकि अधिक से अधिक लोग हिंसा का रास्ता छोड़ सकें।
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