GA4-314340326 गिरिडीह : आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में रंगामाटी, 200 आदिवासियों से विकास के नाम पर धोखा

गिरिडीह : आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में रंगामाटी, 200 आदिवासियों से विकास के नाम पर धोखा

 न सड़क, न बिजली, न पानी, न इलाज : पगडंडी से स्कूल, खाट पर अस्पताल 
सरकार पर उठे सवाल : प्रस्ताव पास पर काम ठप, अफसर बोले- अब मिली जानकारी

Giridih: 78 years after independence, Rangamati remains in the dark, 200 tribals cheated in the name of development
गांव में लगे सोलर पंप खराब पानी के लिए परेशान लोग।
अमित सहाय / गिरिडीह : विकसित भारत और आदिवासी उत्थान के तमाम दावों के बीच गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के अंतिम छोर पर बसा रंगामाटी गांव आजादी के 78 साल बाद भी 19वीं सदी का जीवन जीने को मजबूर है। करीब 200 आदिवासियों की आबादी वाला यह गांव सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह महरूम है। सरकार और प्रशासन ने विकास के नाम पर सिर्फ कागजी प्रस्ताव दिए, जमीन पर हालात जस के तस हैं। 

जान जोखिम में डाल स्कूल जाते बच्चे

गांव तक जाने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। इसका सीधा खामियाजा बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। गांव के मासूम रोज एक किमी दूर मंझलाडीह मोड़ स्थित स्कूल जाने के लिए घने जंगल की सुनसान, पथरीली और खतरनाक पगडंडी से गुजरते हैं। हर कदम पर जंगली जानवरों का खौफ और फिसलकर गिरने का डर बना रहता है। अभिभावक हर दिन डर के साये में बच्चों को स्कूल भेजते हैं।

10 किमी में डॉक्टर नहीं, खाट पर लदकर अस्पताल  

स्वास्थ्य सुविधा का हाल सबसे बुरा है। गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र तो दूर, फर्स्ट-एड की भी व्यवस्था नहीं है। सबसे नजदीकी अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र घनघरीकुरा 10 किमी दूर है, लेकिन वहां भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। तिसरी सीएचसी प्रभारी डॉ. देवव्रत कुमार ने खुद माना कि केंद्र सिर्फ एएनएम के भरोसे चल रहा है। 

इमरजेंसी में ग्रामीणों को तिसरी 35 किमी, गांवां 30 किमी या राजधनवार 25 किमी भागना पड़ता है। पथरीले रास्ते के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। नतीजा- गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर, कंधे पर उठाकर कई किमी पहाड़ पार कर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

अंधेरे में जिंदगी, बूंद-बूंद को तरसे लोग 

विद्युत सबस्टेशन तिसरी के मिस्त्री महताब अंसारी ने बताया कि रंगामाटी में आज तक बिजली का एक खंभा तक नहीं गड़ा। ग्रामीणों का आवेदन जिला कार्यालय गिरिडीह भेजा गया है। निर्देश मिलते ही काम शुरू होगा। यह जवाब सालों से मिल रहा है। वहीं पीएचईडी के जेई देवनाथ महतो ने माना कि नल-जल योजना महीनों से खराब पड़ी है। संवेदक को मरम्मत के लिए कहा गया है, जल्द पानी चालू हो जाएगा। यह आश्वासन भी पुराना है।

4 महीने पहले पास हुआ प्रस्ताव, फाइलों में दफन 

बरवाडीह पंचायत के मुखिया डोमी महथा ने बताया कि सड़क निर्माण का प्रस्ताव 4 महीने पहले ही पंचायत में पारित हो चुका है, लेकिन जमीन पर एक गिट्टी तक नहीं गिरी। नए पंचायत सचिव व्यास पंडित ने कहा कि समस्या संज्ञान में है और प्रखंड कार्यालय को लिखित सूचना दे दी गई है। 

बीडीओ को अब मिली जानकारी  

तिसरी बीडीओ मनीष कुमार का बयान सबसे चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, मुझे अब जानकारी मिली है कि रंगामाटी में सड़क, बिजली और पानी नहीं है। गांव में सुविधा अब तक क्यों नहीं पहुंची, इसकी जांच कराई जाएगी। गांव तक बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने की पहल की जाएगी।

सीमा विवाद की सजा भुगत रहे आदिवासी 

गांवां और राजधनवार प्रखंड की सीमा से सटा यह गांव आधिकारिक तौर पर तिसरी में आता है। लेकिन दूरी और दुर्गम रास्तों का हवाला देकर तीनों प्रखंडों के प्रशासन ने इसे इसके हाल पर छोड़ दिया है। सवाल उठता है कि जब हर साल 'आदिवासी विकास मद' में करोड़ों खर्च होते हैं, डीएमएफटी फंड आता है, तो रंगामाटी तक एक सड़क क्यों नहीं पहुंची? क्या 200 आदिवासियों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? 

विकास के नाम पर सिर्फ धोखा

ग्रामीणों का दर्द है कि चुनाव के वक्त नेता वादों की झड़ी लगा देते हैं, फिर 5 साल तक कोई झांकने नहीं आता। आजादी का अमृत महोत्सव मना लिया, हर घर जल योजना चल रही है, "सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली पहुंचाने का दावा है, पर रंगामाटी में एक भी योजना जमीन पर नहीं उतरी। यह विकास नहीं, 200 जिंदगियों के साथ धोखा है।




Post a Comment

please do not enter any spam link in the comment box.

और नया पुराने