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| अपने कार्यालय में फाइल चेक करते उपायुक्त रामनिवास यादव। |
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDOs) को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
गांवों में लगेंगे बेनेफिशियरी सैचुरेशन कैंप
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान के तहत चिन्हित गांवों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। उपायुक्त के अनुसार, अभियान का खाका इस प्रकार तैयार किया गया है...
18 मई : जन भागीदारी सप्ताह का भव्य शुभारंभ। जिला से लेकर पंचायत स्तर तक व्यापक प्रचार-प्रसार।
19-25 मई : गांवों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया।
20 मई : विलेज इमर्शन ड्राइव इसके तहत अधिकारी और कर्मयोगी गांवों में रात गुजारेंगे या सीधा संवाद कर जमीनी हकीकत जानेंगे।
21-23 मई : जन सुनवाई कार्यक्रम। मौके पर ही शिकायतों का निपटारा और लंबित मामलों का निष्पादन।
25 मई : समाहरणालय में समीक्षा बैठक और भविष्य की रणनीति पर चर्चा।
संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का निर्देश
उपायुक्त यादव ने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि इस अभियान में शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि अधिकारी संवेदनशीलता के साथ फील्ड में उतरें। हमारा लक्ष्य शत-प्रतिशत आच्छादन (100% Saturation) है। कोई भी पात्र लाभुक अपनी हकमारी के कारण योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी विभागों को आपसी समन्वय (Coordination) बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े लाभ तुरंत हस्तांतरित किए जा सकें।

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