किसे कहां भेजा गया
स्थानांतरण सूची के अनुसार, तिसरी में कार्यरत JE और AE को तत्काल प्रभाव से नए स्थानों पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
रंजीत महतो (सहायक अभियंता) : तिसरी से गांवा।
संजय साहू (कनीय अभियंता, मनरेगा): तिसरी से सरिया।
बीरेंद्र कुमार (कनीय अभियंता) : तिसरी से सरिया।
दीपक चौधरी (कनीय अभियंता): तिसरी से गांवा।
इनके स्थान पर गांवा के सहायक अभियंता संतोष कुमार, कनीय अभियंता हरीश चंद्र मरांडी और सरिया के कनीय अभियंता मंटू कुमार महतो को तिसरी प्रखंड में पदस्थापित किया गया है।
आत्मदाह की चेतावनी के बाद जागा प्रशासन
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा विरोध प्रदर्शन रहा है। पूर्व बीस सूत्री सदस्य **उपेंद्र साव** पिछले काफी समय से इन कर्मियों के एक ही स्थान पर जमे होने का विरोध कर रहे थे।
रामनवमी के बाद तबादले का लिखित आश्वासन मिला था, लेकिन वादाखिलाफी होने पर मुझे आत्मदाह जैसा कठोर निर्णय लेने को विवश होना पड़ा। -उपेंद्र साव, पूर्व बीस सूत्री सदस्य
बता दें कि उपेंद्र साव ने पूर्व में प्रखंड कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया था, जिसे खोरीमहुआ अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर एक्सक्यूटिव मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त कराया गया था। प्रशासन ने रामनवमी के बाद तबादले की बात कही थी, लेकिन देरी होने पर साव ने पुनः भूख हड़ताल और आत्मदाह की चेतावनी दे दी थी, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।
एक जेई पर अब भी 'मेहरबानी' क्यों?
प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के बावजूद एक नाम ने सबका ध्यान खींचा है। मनरेगा के कनीय अभियंता आलोक कुमार, जो वर्षों से तिसरी में ही कार्यरत हैं, उनका नाम इस तबादला सूची से गायब है।
बाकी सभी साथियों के तबादले के बीच केवल आलोक कुमार का स्थानांतरण न होना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उन्हें किस आधार पर रियायत दी गई है, जबकि वे भी उसी श्रेणी में आते हैं जिनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था।

إرسال تعليق
please do not enter any spam link in the comment box.