फोटो : राज्यपाल संतोष गंगवार से मिल कर अपनी पीड़ा बताते सीआईपी के सुरक्षाकर्मी व कमलेश राम।
कांके,(रांची)। केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी), कांके,रांची में 20 -25 वर्ष से अधिक समय तक सेवा देने के बाद अचानक नौकरी से हटाए गए 156 निजी सुरक्षाकर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर अपनी पीड़ा और व्यथा बताई। भाजपा झारखंड प्रदेश अनुसूचित जाति उपाध्यक्ष कमलेश राम के नेतृत्व में गए सीआईपी सुरक्षाकर्मी अधिकार संघर्ष समिति के चंद्रमौलेश्वर कुमार, अजय उरांव, संगीता उरांव और बनीता गाड़ी ने राज्यपाल को एक पत्र देकर उनसे संरक्षण देते हुए न्याय दिलाने की गुहार लगाई। बताया कि संस्थान द्वारा 30 जनवरी की रात्रि नौ बजे अचानक उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उनको किसी वैकल्पिक रोजगार का अवसर और समय नहीं दिया गया। आज वे सभी पूरे परिवार सहित सड़क पर आ गए हैं। इसको लेकर तीन फरवरी से वे सभी बाध्य होकर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं, ताकि उनको पुनः नौकरी मिल सके। उनके समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। बच्चों की शिक्षा, परिवार का भरण-पोषण और सामाजिक सम्मान पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बताया कि हम अधिकांश सुरक्षाकर्मी स्थानीय, गरीब, दलित-आदिवासी तथा पिछड़े वर्ग से आते हैं। राज्यपाल संतोष गंगवार ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखने का आश्वासन दिया। कहा कि उनका प्रयास होगा कि इस मामले में उन सभी के साथ न्याय हो। इधर मुलाकात के बाद कमलेश राम ने कहा कि सीआईपी प्रशासन द्वारा सुरक्षाकर्मियों की सेवा समाप्त करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। उनका लाखों रूपये का मुआवजा का भुगतान नहीं हुआ है। पूर्व की एजेंसी और संस्थान के तत्कालीन पदाधिकारियों ने मिलीभगत कर गरीब सुरक्षाकर्मियों का पैसा डकारा है। इधर सीआईपी में सुरक्षा घोटाला की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा होते ही मुख्य गवाहों को ही आनन फानन में हटा दिया गया है। यह फैसला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही गरीब, दलित-आदिवासी और पिछड़े वर्ग से आने वाले परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है। कमलेश राम ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर सुरक्षाकर्मियों को बहाल नहीं करता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने मानवीय आधार पर राज्य सरकार से होमगार्ड्स को अविलंब हटाने की मांग की है। कहा कि पूर्व निदेशक डॉ तरुण कुमार के साथ मारपीट का झूठा आरोप गार्ड्स पर लगा कर उनको हटाया गया है। कहा कि डॉक्टर तरुण कुमार और महानिदेशालय के तत्कालीन उप निदेशक एमके वर्मा ने मिलीभगत कर गरीब गार्ड्स से 40 से लेकर 80 हजार तक की मांग अपने लाए गए एक व्यक्ति के माध्यम से किया था। इसका विरोध करने तथा इसकी लिखित शिकायत मंत्रालय और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से करने के बाद से जांच बैठी थी। इसके बाद एमके वर्मा और तरुण कुमार दोनों को हटा दिया गया था। लेकिन इसके पूर्व इसमे जिनपर गड़बड़ी का आरोप लगा था, उसको ही चेयरमैन बना कर पूरे मामले को रफा दफा कर दिया गया था। ऐसे में उस पूरे मामले की जांच कर उनपर कड़ी कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
सीआईपी सुरक्षाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिल बताई अपनी पीड़ा, राजभवन से सीएम को जाएगा पत्र
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