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| आरपीएफ के संरक्षण में चारों बच्चे। |
कैसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन?
कोडरमा चाइल्डलाइन को मंगलवार की सुबह वनवासी विकास आश्रम के समन्वयक उत्तम कुमार ने बाल तस्करी की सूचना दी। बिना समय गंवाए यह सूचना हजारीबाग रोड (सरिया) रेलवे स्टेशन के RPF को दी गई। आरपीएफ की टीम ने ट्रेन संख्या 12365 (रांची-पटना जनशताब्दी एक्सप्रेस) के कोच संख्या D-5 में छापेमारी की। वहां से 3 से 8 वर्ष की आयु के चार बच्चों को अपने संरक्षण में लिया। मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया, जिसकी पहचान बिहार के जहानाबाद जिला निवासी पिंटू राठौड़ (पिता- लालन राठौड़) के रूप में हुई है।
फिलहाल बच्चों की पहचान नहीं हो सकी है
पूछताछ के दौरान आरोपी पिंटू राठौड़ बच्चों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। मामले की गंभीरता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया गया। फिलहाल बच्चों की पहचान नहीं हो सकी है। लेकिन, यह अंश और अंशिका जैसे बच्चों की गुमशुदगी के बाद पूरा प्रशासन हाई अलर्ट पर है। ऐसे में इन चार बच्चों का रेस्क्यू होना एक बड़ी उम्मीद जगाता है।
ऑपरेशन में इनकी रही मुख्य भूमिका
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सहयोगी संस्था बनवासी विकास आश्रम, आभा संस्था और आरपीएफ सरिया का विशेष योगदान रहा। व्यक्तिगत रूप से उत्तम कुमार, छोटेलाल यादव और भागीरथी देवी की सजगता ने इन मासूमों का भविष्य अंधकार में जाने से बचा लिया।
समाज और पुलिस के लिए बड़ा संदेश
जहां एक ओर राजधानी रांची के लोग 2 जनवरी से लापता बच्चों (अंश और अंशिका) की सकुशल बरामदगी के लिए दुआएं कर रहे हैं, वहीं गिरिडीह की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज और पुलिस मुस्तैद रहे, तो तस्कर अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे।

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