कांके,(रांची)। केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) में विगत तीन दशक से अधिक समय से कार्यरत रहे निजी सुरक्षाकर्मियों को 31 जनवरी से हटाने का आदेश जारी हो गया है। 24 जनवरी की देर शाम संस्थान के डायरेक्टर डॉ वीके चौधरी के द्वारा एजेंसी को मेल भेज कर इसकी जानकारी दी गई। इसमें लिखा गया है कि आपको 31 जनवरी तक मिले अस्थाई अवधि विस्तार को आगे बढ़ाने से मंत्रालय ने मना कर दिया है। इसको देखते हुए आपकी सेवा को 31 जनवरी या उससे पहले समाप्त माना जाएगा। एजेंसी को कहा गया है कि वे गार्ड्स को हटा लें। यदि कोई हंगामा या अव्यवस्था होती है तो एजेंसी को जिम्मेवार माना जाएगा। मंत्रालय और संस्थान के इस निर्णय से वर्तमान समय में कार्यरत 153 सुरक्षाकर्मी बेरोजगार हो जायेंगे। इनमें से अधिकांश 15 से 20 साल पुराने हैं। कार्य कर रहे गार्ड्स में अधिसंख्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समाज तथा मूलवासी स्थानीय हैं। इतने कम समय में दी गई सूचना के कारण गार्ड्स के पास रोजगार का कोई दूसरा विकल्प भी मौजूद नहीं है। इस निर्णय से सभी गार्ड्स और उनपर निर्भर सैकड़ों लोगों के जीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। बताते चलें मौजूदा एजेंसी को एक छह माह के अस्थाई अवधि विस्तार के साथ कुल डेढ़ वर्ष का अवसर दिया गया। इसके पहले एसआईएस एजेंसी को संस्थान के वरीय अधिकारियों के विशेष कृपा से बिना किसी निविदा के 30 साल से अधिक तक कार्य पर रखा गया था। सांसद दीपक प्रकाश ने उठाई है आवाज : राज्य सभा सांसद सह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख कर वर्तमान समय में चल रही निजी सुरक्षाकर्मियों की सेवा की व्यवस्था को जारी रखने का आग्रह किया है। कहा कि कोविड जैसे समय में जिन्होंने अच्छा कार्य किया उनको भुखमरी, मानसिक अवसाद एवं सामाजिक असुरक्षा की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने गार्डों को हटाने को पूर्व नियोजित साजिश एवं प्रतिशोधात्मक कारवाई बताया है। सांसद दीपक प्रकाश ने सीआईपी में वर्तमान समय में गंभीर प्रशासनिक अराजकता, अमानवीय निर्णयों एवं निदेशक स्तर पर संदिग्ध कार्यप्रणाली की ओर केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए संस्थान में मरीजों और कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने आदि की उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने निदेशक को कर्तव्य विमुख बताया है। उनके अलावे गार्ड्स की सेवा बनाए रखने के लिए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो आदित्य प्रसाद साहू भी उठ खड़े हुए हैं। *कांग्रेस और जेएमएम भी समर्थन में :*
संस्थान से स्थानीय निजी सुरक्षाकर्मियों को सेवा से हटाए जाने के निर्णय के बाद कांग्रेस और झामुमो पार्टी स्थानीय निजी सुरक्षाकर्मियों के खुलकर समर्थन में आ गए हैं। कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार बैठा, खिजरी विधायक राजेश कच्छप, कांग्रेस पार्टी रांची जिला अध्यक्ष सोमनाथ मुंडा, प्रखंड अध्यक्ष संजर खान, जेएमएम के निवर्तमान जिला अध्यक्ष मुश्ताक आलम, प्रखंड अध्यक्ष नवीन तिर्की, संयोजक सोनू मुंडा आदि ने भी सीआईपी प्रशासन के इस निर्णय का जोरदार विरोध किया है। कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार बैठा ने कहा कि उनकी पार्टी तथा सहयोगी झामुमो ने यहां के गार्डों को दिए जा रहे कम वेतन को लेकर जोरदार आंदोलन किया था। उसके बाद नया टेंडर हुआ तथा गार्ड्स को पूरी राशि मिलने लगी। उन्होंने कहा कि राज्य के आदिवासी, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक समाज तथा मूलवासियों को बेरोजगार नहीं होने दिया जाएगा। 60 लाख से अधिक राशि का नहीं हुआ है भुगतान : संस्थान में वर्ष 1993-94 से ही एसआईएस एजेंसी द्वारा सुरक्षा गार्ड्स लगाया गया था। बाद में गार्ड्स की संख्या बढ़कर 122 तक पहुंच गई। किंतु यहां कार्य करने वाले निजी सुरक्षाकर्मियों आदि को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, बोनस राशि तथा ईपीएफ राशि का समुचित भुगतान कभी नहीं किया गया। इस भ्रष्टाचार में उस समय के अधिकारी शामिल थे। उनमें से कइयों पर सीबीआई जांच भी चलनी है। उसके पहले निजी सुरक्षाकर्मियों को हटाने से एक बड़ा घोटाला उजागर नहीं हो सकेगा। निजी सुरक्षाकर्मियों को पूरी राशि लेकर कम वेतन, बोनस और ईपीएफ देकर मोटी कमाई करने वाले गवाहों के अभाव में सीधे तौर पर बच निकलेंगे। कम वेतन भुगतान को लेकर 60 गार्ड्स ने वर्ष 2019 में जून 2018 से नवंबर 2018 तक मात्र छह माह में किए गए कम वेतन, ईपीएफ भुगतान आदि को लेकर रीजनल लेबर कमिश्नर सेंट्रल रांची में केस दर्ज कराया था। इसमें एसआईएस के साथ सीआईपी को भी वादी बनाया था। सुनवाई के बाद 30 जून 2025 को सेंट्रल रीजनल लेबर कमिश्नर ने एक माह के भीतर सभी 60 गार्ड्स को मुआवजे के रूप में लगभग 60 लाख की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। लेकिन आज तक इनको भुगतान भी नहीं किया गया है। बिना भुगतान सुनिश्चित कराए सीआईपी प्रशासन गार्ड्स को बाहर का रास्ता दिखाने की ठान बैठा है। प्रधान नियोक्ता होने के कारण सुरक्षाकर्मियों को उनका पूर्ण भुगतान कराना उसकी जवाबदेही भी है। अभी भी यहां कार्यरत गार्ड्स में से लगभग 30 गार्ड्स ने केस नहीं किया है। यदि सभी गार्ड्स यदि पिछले 10-15 सालों में उनको दिए कम राशि की पूर्ण भुगतान की मांग को लेकर केस करते हैं तो एक्सपर्ट्स का कहना है कि एसआईएस और सीआईपी को करोड़ों की राशि का भुगतान करना पड़ेगा। वर्तमान स्थिति में सीआईपी में जोरदार आंदोलन तय दिख रहा है।
सीआईपी में 30 साल से अधिक समय से कार्य कर रहे निजी सुरक्षाकर्मियों को हटा होम गार्ड्स को लगाने की तैयारी ; गार्ड्स के लाखों का भुगतान है बाकी
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