GA4-314340326 वन विभाग का मामला मामला उठायेंगे खिजरी विधायक राजेश कच्छप

वन विभाग का मामला मामला उठायेंगे खिजरी विधायक राजेश कच्छप

मामला सामने आने के बाद किया गया पौधरोपण
अनिल कुमार चौधरी/ angara(ranchi)  खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने सोमवार को झारखंड विधानसभा में वनविभाग द्वारा पौधरोपण घोटाला को लेकर अल्पसूचित सवाल पूछा। इसपर वन विभाग ने गोलमटोल जवाब देकर सच्चाई पर परदा डालने का प्रयास किया। विधायक ने दैनिक भास्कर में छपी खबर का हवाला देते हुए वन विभाग से इसपर जवाब देने को कहा था। इसपर खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि वन विभाग ने सदन में गलत तथ्यों की जानकारी दी है। इसपर सदन मामला उठायेंगे। साथ ही गलत जानकारी देनेवालों के खिलाफ कारवाई के लिए लगातार पत्राचार किया जाएगा। ज्ञात हो कि दैनिक भास्कर ने 13 जुलाई व 17 जुलाई को वनविभाग द्वारा पौधरोपण के नाम पर किए गए घोटाला की विस्तार से खबर छापी थी। इस खबर पर वनविभाग ने अपना पक्ष रखते हुए पौधरोपण की सूची उपलब्ध कराया। इसके बाद दैनिक भास्कर रिर्पोटर ने पौधरोपण किए हुए अनेक स्थलों का ग्राउंड रियलिट चेक किया। इसमें पाया कि दैनिक भास्कर में खबर छपने के बाद दो दिनों से इन जगहों पर पौधरोपण कर मामले की लीपापोती की जा रही है। उन जगहों पर आनन फानन में पौधा रोपण शुरू किया है जिन जगहों पर एक साल पहले पौधे लगाने के दावे किए गए है। महिलोंग रेंज के कोकालगाम, भेलवाटुंगरी, लोवाडीह कब्रिस्तान, रिंग रोड भुसूर व गौशाला सुकुरहुटू में दस फीट लंबाई का पौधारोपण हुआ। लेकिन इन स्थानों में खबर छपने के बाद पौधरोपण शुरू हुआ। इस संबंध में जब डीएफओ श्रीकांत वर्मा पूछा गया कि आखिर जिन जगहों पर पहले ही पौधे लगाए जा चुके है वहां फिर से क्यों पौधे लगाए जा रहे है। इसपर उनका जबाव भी चौकाने वाला था। डीएफओ ने कहा कि जहां पौधों की कैजुअल्टी हुई है वहां पौधे लगाए जा रहे है। जबकि उन्होंने ही लिखित में बताया है कि उन जगहों पर लगाए गए पौधों में औसतन 97 प्रतिशत तक जीवित है। 

बगैर मानक का हुआ पौधरोपण 

पौधारोपण में मानक का भी ध्यान नहीं रखा गया। पौधारोपण के लिए फरवरी में दो फीट लंबा-चौड़ा व गहरा गडढा खोदा जाता है। ताकि समय के साथ गड्ढ़े में कीट, पत्ते आदि जमा होकर खाद बन जाए। गड्ढा को धूप मिले। लेकिन कहीं भी ऐसा नहीं हुआ। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि पौधा 5 मीटर की दूरी पर और एक लाइन से दूसरे लाइन की दूरी तीन मीटर होनी चाहिए। लेकिन किसी भी नियम का पालन नही हुआ। पौधरोपण के दौरान जैविक खाद व दीमक रोधी दवा भी डालना होता है। लेकिन जब खबर छपने के बाद पौधरोपण शुरू हुआ तो फिर जैविक खाद, दीमक रोधी दवा कब डाला गया?? खुले में पौधरोपण गैबियन लगाकर करना है। लेकिन गैबियन भी नहीं लगाया गया। सवाल है जब वन विभाग ने लिखित रिपोर्ट दिया कि औसतन 97 फीसदी तक पौधरोपण सही है तो फिर आनन-फानन में पौधरोपण क्यों। वर्क आर्डर का उल्लेख नही है। चार वर्षीय इस योजना में कितने वाचर कार्यरत है। उनका पेमेंट डिटेल का उल्लेख नही है। 

मामला सामने आने पर डेढ़ साल बाद वन विभाग ने दिया उपयोगिता प्रमाणपत्र  

पथ निर्माण विभाग द्वारा वन विभाग को राशि निर्गत करने के डेढ़ साल बाद वन विभाग ने उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया। डेढ़ साल बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना संदेह के घेरे में है।  वन विभाग की इस योजना के लिए पथ निर्माण विभाग ने वन विभाग को 23 दिसंबर 23 को 5.07 करोड़ की राशि निर्गत कर दी। इसी बीच पौधरोपण की उपयोगिता प्रमाणपत्र देने को लेकर लगातार पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने वन विभाग को पत्राचार किया। जून 2025 में उपयोगिता प्रमाण पत्र के लिए पत्राचार किया गया था। लेकिन खबर छपने के बाद अचानक से वन विभाग रेस हुआ। और पैसा भुगतान करने के डेढ़ साल बाद वनविभाग ने पथ निर्माण विभाग को 26 जून 25 को पत्र लिखकर जानकारी दी।  

Post a Comment

please do not enter any spam link in the comment box.

और नया पुराने