silli(ranchi) एक ओर जहां हर गली मोहल्ले के साथ गांव-गांव में होलिका दहन में लकड़ी जलाई जाती है वहीं दूसरी ओर मारवाड़ी समाज इस अपनी अलग परंपरा का पालन पीढ़ियों से करता आ रहा है। यह समाज लकड़ी नहीं गोबर के कंडों से होलिका दहन को आज भी कायम रखे हुए है। सिल्ली शहर के यूनियन बैंक के समीप वर्षों से में यह परंपरा निभाई जा रही है। होलिका दहन के लिए मारवाड़ी समाज के लोग पूरे परिवार के साथ होलिका स्थल पर पहुंचकर पूजा अर्चना करता है। यहां शहरी क्षेत्र में रहने वाले मारवाड़ी समाज होली त्योहार को अलग अंदाज में मनाने तैयार है। सुबह से लेकर दहन तक पूजन विधि में महिलाएं जुटी रहीं। सुबह से ही गोबर से बने कंडे, माला, रोली, कुमकुम, फूल व चावल से होलिका पूजन होता रहा। रात 10 बजे के बाद मुहूर्त के अनुसार लोगों होलिका दहन किया गया।मारवाड़ी समाज में होलिका दहन का एक विशेष स्थान है। समाज के लोग पूरे विधि-विधान के साथ होलिका दहन करते हैं। जहां प्रत्येक घर से महिलाएं गोबर का बड़कुला (कंडा) व होलिका तैयार कर दहन स्थल पहुंची। दहन कर समाज की कुरीतियों को दूर करने का संकल्प दोहराया। इसके बाद समाज के लोगों ने होलिका में चना, जौ, आदि को सेंककर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इसके अलावा महावीर चौक सिल्ली के समीप भी स्थानीय लोगों द्वारा होलिका दहन किया गया इससे पूर्व पूजा अर्चना की गई एवं प्रसादी बांटी गई।

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