अमित सहाय / गिरिडीह : गावां थाना क्षेत्र के निमाडीह पंचायत अंतर्गत चरकी गांव के पास बुधवार को एक दर्दनाक हादसे में 10 वर्षीय मासूम राजवीर राय की मौत हो गई। दीपावली के पावन पर्व के बीच घटी इस हृदयविदारक घटना से पूरे इलाके में मातम पसर गया है। मृतक राजवीर (कक्षा 4 का छात्र) चरकी निवासी विजय राय का पुत्र था। इस हादसे में एक अन्य बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर किया गया है।
मृतक राजवीर राय।
दीपावली की तैयारियों के बीच टूटा दुखों का पहाड़
जानकारी के अनुसार, राजवीर दीपावली के अवसर पर घर की लिपाई-पुताई के लिए जानकी पहाड़ी की ओर मिट्टी लाने गया था। इसी दौरान वहां स्थित एक बंद पड़ी खदान की अचानक चाल भरभराकर गिर गई, जिससे वह मलबे की चपेट में आ गया।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और भारी मशक्कत के बाद बच्चे को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उसकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर तराई पिकेट के रास्ते पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गिरिडीह भेज दिया।
मिट्टी या माइका? उलझा सवाल
हादसे को लेकर स्थानीय स्तर पर दो तरह की बातें सामने आ रही हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चा केवल घर की पुताई के लिए मिट्टी लाने गया था। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चे बंद पड़ी खदानों के पास ढीबरा (माइका) चुनने के लिए गए थे।
फिलहाल पुलिस दोनों ही पहलुओं को ध्यान में रखकर गहराई से जांच कर रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सच यह है कि इस जानलेवा हादसे की जड़ें उन असुरक्षित और बंद पड़ी खदानों में हैं, जिन्हें खुला छोड़ दिया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही व व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस दुर्घटना ने एक बार फिर गावां-तिसरी इलाके की खस्ताहाल प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय उदासीनता को बेनकाब कर दिया है। ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों द्वारा ये गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं...
1. मौत का कुआं बनीं खुली खदानें : गावां-तिसरी क्षेत्र में सैकड़ों बंद माइका खदानें बिना किसी वैज्ञानिक पद्धति के यूं ही खुली छोड़ दी गई हैं। न तो इनकी घेराबंदी की गई है और न ही वहां कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा गार्ड तैनात है।
2. वन विभाग की निष्क्रियता : क्षेत्र की अधिकांश खदानें वन भूमि के अंतर्गत आती हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने आज तक इन खतरनाक खानों को भरने या उनकी बैरिकेडिंग करने की कोई सुधि नहीं ली है।
3. खनन विभाग की चुप्पी : इलाके में आज भी अवैध रूप से ढीबरा चुनने का काम जारी है, लेकिन खनन विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना बैठा है।
4. विपरीत हालात और गरीबी : स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अभाव के चलते मासूम बच्चे 50-100 रुपये की खातिर अपनी जान जोखिम में डालकर इन खदानों का रुख करने को मजबूर हैं। यह स्थिति प्रशासनिक विफलता और बाल श्रम दोनों की पोल खोलती है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
* मृतक के शोक-संतप्त परिवार को अविलंब 10 लाख रुपये का मुआवज दिया जाए।
* क्षेत्र की सभी बंद पड़ी माइका खदानों की त्वरित घेराबंदी और सुरक्षा बैरिकेडिंग सुनिश्चित हो।
* इस घोर लापरवाही के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस और प्रशासन का एक्शन
घटना की सूचना मिलते ही गावां थाना प्रभारी जयप्रकाश कुमार और प्रभारी अंचल अधिकारी अभिषेक कुमार ने दलबल के साथ घटनास्थल का जायजा लिया।
थाना प्रभारी ने नवभास्कर को बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, घायल बच्चे के बेहतर इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.