राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में बोले डीडीसी- कानून को लेकर उत्साह, लेकिन भ्रांतियां दूर करना जरूरी
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| दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करतीं उपायुक्त कंचन सिंह |
डीसी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्रामसभा के कार्यों में किसी भी विवाद को सुलह, समझौते और सद्भाव के साथ निपटाया जाना चाहिए।
पारंपरिक स्वशासन को मजबूत करेगा पेसा: डीडीसी
डीडीसी दीपांकर चौधरी ने कानून की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में मुंडा, मानकी, मांझी और पाहन जैसी पारंपरिक स्वशासन प्रणालियां स्थानीय लोकतंत्र की मजबूत नींव रही हैं। पेसा कानून इन व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए पंचायती राज को सशक्त करेगा।
डीडीसी ने स्वीकार किया कि पेसा को लेकर लोगों में उत्साह तो है, लेकिन कई भ्रांतियां और जागरूकता की कमी भी है। इसे दूर करने की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और प्रशासनिक अधिकारियों की है। राज्य सरकार ने समावेशी नियमावली बनाई है, जिसके लिए अब अन्य विभागों के नियमों को भी इसके अनुकूल ढालना होगा।
ग्रामसभा की शक्तियों पर हुआ मंथन
राज्य पेसा समन्वयक व मुख्य प्रशिक्षक सुधीर पाल ने नियमावली के मुख्य प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय विकास योजनाओं में सामुदायिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में ग्रामसभा की शक्तियों, अधिकारों व दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में पेसा से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए सभी विभागों और सिविल सोसाइटी को मिलकर काम करने का सुझाव दिया गया।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ डीसी कंचन सिंह, डीडीसी दीपांकर चौधरी, अपर समाहर्ता ज्ञानेन्द्र, परियोजना निदेशक आईटीडीए सरोज तिर्की, राज्य पेसा समन्वयक सुधीर पाल और जिला आपूर्ति पदाधिकारी नरेश रजक ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इस दौरान जिला-प्रखंड स्तर के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और पारंपरिक ग्रामसभा के अध्यक्ष मौजूद थे।

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