GA4-314340326 बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने पूरे किए स्थापना के 46 वर्ष, गवर्नर ने कहा नौकरी देने वाले बने स्टूडेंट्स

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने पूरे किए स्थापना के 46 वर्ष, गवर्नर ने कहा नौकरी देने वाले बने स्टूडेंट्स

फोटो: शिक्षकों कर्मियों को सम्मानित करते राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार एवं वीसी डॉ एससी दुबे। फोटो: बीएयू के स्थापना दिवस पर पुस्तिका का विमोचन करते राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार एवं वीसी डॉ एससी दुबे। KANKE,(RANCHI)। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने स्टूडेंट्स से नौकरी प्रदाता बनने का आह्वान किया है। वे शुक्रवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के 46वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कहा कि कृषि स्नातक छात्र छात्राएं केवल आजीविका के लिए नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रह कर ऐसे उद्यमी बनें जो दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकें। कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की समृद्धि का सशक्त आधार भी है। विकसित भारत का मार्ग कृषि क्षेत्र से होकर ही गुजरता है। राज्यपाल ने कहा कि बीएयू के वैज्ञानिकों का योगदान शोध-पत्रों के प्रकाशन, वैज्ञानिक संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी अथवा विकसित तकनीकों की संख्या से नहीं, बल्कि किसानों की कृषि उत्पादन,आय,सुख-सुविधा एवं जीवन स्तर में हुई वृद्धि के आधार पर आँका जाएगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को लगातार यह मूल्यांकन करते रहना चाहिए कि उनके द्वारा विकसित तकनीकें किसानों के खेतों तक कितनी पहुँची हैं और उनका क्या प्रभाव पड़ा है। वहीं विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची के निदेशक डॉ सुजय रक्षित ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के प्रकृति के अधिक निकट होने के कारण झारखंड में प्राकृतिक खेती का विस्तार अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सहजता से किया जा सकता है। उन्होंने उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण एवं सर्वोत्तम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में फसल सघनता बढ़ाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में झारखंड की फसल सघनता लगभग 120 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 140 प्रतिशत है। महज 15 फीसदी बचे हैं नियमित शिक्षक : वहीं बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने विश्वविद्यालय के समक्ष खड़ी गंभीर समस्या से कुलाधिपति को अवगत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में स्वीकृत शिक्षकों की संख्या के महज 15 प्रतिशत नियमित शिक्षक ही बचे हैं। यह स्थिति महाविद्यालयों के एक्रीडेशन तथा आईसीएआर रैंकिंग में सुधार के लिए एक बड़ी चुनौती है। बताया कि इन चुनौतियों के बीच भी विश्वविद्यालय में ने गत वर्ष विभिन्न प्रकार के अनाज, दलहन एवं तिलहन की पाँच हजार क्विंटल से अधिक गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन किया। इसके अलावा फल, सब्जी, पुष्प, औषधीय और सुगंधित फसलों के लगभग आठ लाख गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार किए गए। धन्यवाद ज्ञापन छात्र कल्याण निदेशक डॉ बीके अग्रवाल ने किया। रिटायर्ड शिक्षकों व कर्मियों को किया गया सम्मानित :। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में सराहनीय योगदान देने वाले छह सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इनमें डॉ सीएसपी सिंह, डॉ बीएन प्रसाद, डॉ केडी सिंह, महेंद्र ठाकुर, एनसी मिश्र तथा बलकू नायक शामिल हैं। पुस्तकों का हुआ विमोचन, प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित: इस अवसर पर बीएयू, रांची के डॉ. नीरज कुमार एवं बीएयू, भागलपुर की डॉ. श्रेया सेन द्वारा लिखित पुस्तक 'प्लांट ब्रीडिंग एंड जेनेटिक्स क्वेश्चनेयर', डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती एवं अन्य द्वारा संकलित 'थीसिस एब्स्ट्रैक्ट्स ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग' तथा बीएयू वार्षिक प्रतिवेदन (2025-26) का विमोचन भी किया गया। साथ ही बीज उत्पादन, प्राकृतिक खेती, मत्स्य पालन, जैविक सब्जी उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन में नवाचार के लिए पाँच प्रगतिशील किसानों बीरेंद्र कुमार (उंटा, चतरा), अशोक कुमार (मेराल, गढ़वा), उदय सिंह (सतबरवा, पलामू), दिनेश उरांव (भंडरा, लोहरदगा) तथा कीर्तिमान नाथ (कोलेबिरा, सिमडेगा) को सम्मानित किया गया। वहीं शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, स्नातकोत्तर एवं स्नातक छात्रों के लिए आयोजित अलग-अलग निबंध प्रतियोगिताओं में अमित कुमार झा, शालिनी सिंह, बलराम कुमार और प्राची शर्मा ने अपनी-अपनी श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। तीरंदाजी प्रतियोगिता बालक वर्ग के अभिषेक कुमार यादव तथा बालिका वर्ग में सृष्टि पंडित को प्रथम स्थान हासिल करने पर पुरस्कृत किया गया।

Post a Comment

please do not enter any spam link in the comment box.

أحدث أقدم