GA4-314340326 राजनीति की भेंट चढ़ा करोड़ों का ग्रिड: बनकर तैयार है चोरडेरा सबस्टेशन, पर नहीं हो रहा उद्घाटन

राजनीति की भेंट चढ़ा करोड़ों का ग्रिड: बनकर तैयार है चोरडेरा सबस्टेशन, पर नहीं हो रहा उद्घाटन

दो साल से उद्घाटन का इंतजार कर रहा पावर ग्रिड सब स्टेशन।
अनूप महतो/ सिल्ली (रांची): रांची जिला अंतर्गत सिल्ली, सोनाहातू, राहे और बुंडू के हजारों उपभोक्ताओं को 'पावर कट' और 'लो-वोल्टेज' से निजात दिलाने के लिए बना 132/33 केवी पावर ग्रिड राजनीति और 'क्रेडिट वॉर' के भंवर में फंसा है। विडंबना देखिए कि जिस ग्रिड का शिलान्यास वर्ष 2020-22 के बीच बंता में हुआ था, वह आज सिल्ली के चोरडेरा में बनकर खड़ा है। करीब 38 करोड़ की लागत से बना यह ढांचा बीते 2-3 सालों से उद्घाटन की बाट जोह रहा है, जबकि क्षेत्र की जनता आज भी अंधेरे और ट्रिपिंग से जूझ रही है।

बंता में हुआ शिलान्यास, चोरडेरा में खड़ा हुआ ढांचा

सरकारी फाइलों में इस ग्रिड की स्वीकृति बंता क्षेत्र के लिए मिली थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत इसे बंता से हटाकर चोरडेरा में शिफ्ट कर दिया गया। चर्चा तो यह भी है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पेटी ठेकेदारी से जुड़े कुछ रसूखदार राजनेताओं ने एक निजी कंपनी (हिंडालको) को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रिड का स्थान बदलवा दिया। जब निर्माण स्थल बदला गया, तब बंता और आसपास के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई थी, जिसके कारण काम कुछ समय तक ठप भी रहा। लेकिन अंततः रसूख के आगे जनभावनाएं हार गईं।

एलएंडटी से 'माननीय' की कंपनी तक पहुंचा काम

इस ग्रिड के निर्माण का जिम्मा विख्यात कंपनी 'एलएंडटी' (L&T) को मिला था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि निर्माण का वास्तविक कार्य एलएंडटी ने एक प्रभावशाली राजनेता की कंपनी को पेटी ठेके पर दे दिया। वर्तमान में ग्रिड की स्थिति यह है कि स्टाफ क्वार्टर, कंट्रोल रूम, स्टोर और ऑफिसर्स क्वार्टर समेत 100 एमवीए क्षमता के भारी-भरकम ट्रांसफार्मर लग चुके हैं। सुरक्षा के लिए पांच होमगार्ड के जवान भी तैनात हैं, लेकिन ग्रिड 'चार्ज' नहीं हो सका है।

क्या रुकवट है

परियोजना के वर्तमान प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश किशोर के अनुसार, वे बीते 7-8 महीनों से यहां कार्यरत हैं और ग्रिड करीब 2 साल पहले ही बनकर तैयार हो चुका है। फिलहाल सबसे बड़ी बाधा ट्रांसमिशन लाइन का विस्तार है। कुछ स्थानों पर टावर खड़ा करने में तकनीकी और स्थानीय समस्याएं आ रही हैं। जैसे ही लाइन का काम पूरा होगा, ग्रिड चालू कर दिया जाएगा।

जनता को क्या होगा फायदा

यदि यह ग्रिड चालू होता है, तो क्षेत्र की सूरत बदल जाएगी। निम्नलिखित समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा...

 स्थिर वोल्टेज : 33 केवी की जगह 132 केवी से सप्लाई मिलने पर लो-वोल्टेज की समस्या जड़ से खत्म होगी।

 निर्बाध बिजली : लोकल ग्रिड होने से बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और पावर कट कम होंगे।

 औद्योगिक विकास : सिल्ली इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्रियों को स्टेबल बिजली मिलेगी, जिससे रोजगार और व्यापार बढ़ेगा।

सफेद हाथी साबित न हो जाए यह ग्रिड

 करोड़ों की लागत से तैयार यह ग्रिड वर्तमान में किसी 'सफेद हाथी' से कम नहीं दिख रहा। एक ओर जनता बिजली के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं दूसरी ओर तैयार ग्रिड केवल उद्घाटन और क्रेडिट लेने की राजनीति के कारण धूल फांक रहा है। अब देखना यह है कि विभाग और सरकार कब इस 'पावर पॉलिटिक्स' से ऊपर उठकर जनता को रोशनी देते हैं।


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