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| लोक भवन में जस्टिस गुप्ता को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते राज्यपाल। |
इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति गुप्ता को पुष्पगुच्छ भेंट कर उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न्यायिक जगत की दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं।
लंबे समय से खाली पड़े इस पद के भरने से झारखंड में 'जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन' की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि फाइलों में दबे भ्रष्टाचार के पुराने मामलों पर कितनी तेजी से गाज गिरती है।
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
झारखंड में लोकायुक्त का पद जनवरी 2019 से खाली पड़ा था। न्यायमूर्ति डी.एन. उपाध्याय का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह सबसे बड़ी संस्था प्रमुख विहीन थी। 5 साल और 3 महीने के लंबे इंतजार के बाद अब राज्य को नया लोकायुक्त मिला है, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
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| जस्टिस गुप्ता को बधाई देते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। |
जानिए कौन हैं जस्टिस गुप्ता
न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार गुप्ता झारखंड न्यायिक सेवा और उच्च न्यायालय के एक प्रतिष्ठित नाम रहे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बिहार न्यायिक सेवा से की थी। झारखंड बनने के बाद वे यहां की न्यायिक सेवा का हिस्सा बने। उन्होंने लंबे समय तक जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इस पद से सेवानिवृत्त होने के बाद, अब उन्हें उनकी बेदाग छवि और न्यायिक अनुभव के कारण झारखंड के लोकायुक्त जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरल शब्दों में कहें तो, वे एक अनुभवी कानूनविद हैं जिन्हें प्रशासन और न्यायपालिका के कामकाज का दशकों का अनुभव है।
महत्वपूर्ण फैसले : झारखंड हाई कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई की और अहम फैसले सुनाए। वे अपनी निष्पक्षता और कानून की गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं।
क्या है लोकायुक्त का काम
लोकायुक्त राज्य स्तर पर एक भ्रष्टाचार विरोधी संस्था है। इनका मुख्य कार्य निम्नलिखित है...
जांच : लोक सेवकों (मंत्रियों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों) के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करना।
पर्यवेक्षण : भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों को दिशा-निर्देश देना।
पारदर्शिता : शासन प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पद के दुरुपयोग को रोकना।
आम आदमी कैसे कर सकता है शिकायत
कोई भी आम नागरिक सीधे लोकायुक्त से शिकायत कर सकता है। इसकी प्रक्रिया सरल है, जो निम्न है...
1. लिखित शिकायत : शिकायतकर्ता को एक निश्चित प्रारूप (Form) में हलफनामे (Affidavit) के साथ लिखित शिकायत दर्ज करानी होती है।
2. साक्ष्य : शिकायत के समर्थन में प्रारंभिक साक्ष्य या दस्तावेज संलग्न करने होते हैं।
3. सीधा संवाद : लोकायुक्त कार्यालय में डाक के माध्यम से या स्वयं उपस्थित होकर शिकायत दी जा सकती है।
नोट : लोकायुक्त झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंड देने का अधिकार भी रखते हैं, इसलिए शिकायत का तथ्यात्मक होना अनिवार्य है।


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