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| नार्थ अरीमारी का सीएचपी सिलो प्लांट। |
ओबीआर में बनाया ‘ऑल टाइम हाई’ रिकॉर्ड
बरका-सयाल ने इस साल ओबी (ओवरबर्डन) हटाने में करिश्माई प्रदर्शन किया है। वार्षिक लक्ष्य 16.2 मिलियन क्यूबिक मीटर को समय से 105 दिन पहले ही 16 दिसंबर, 2025 को प्राप्त कर लिया गया। 14 दिसंबर को एक दिन में 1.0 लाख क्यूबिक मीटर ओबी हटाकर क्षेत्र ने अपनी स्थापना के बाद का सर्वोच्च रिकॉर्ड कायम किया। कुल ओबीआर 236.79 लाख क्यूबिक मीटर रहा, जो लक्ष्य का 146% है।
रैक डिस्पैच में 20% की शानदार वृद्धि
क्षेत्र ने डिस्पैच के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की। कुल 2063 रैक डिस्पैच किए गए, जो पिछले वर्ष (1725 रैक) की तुलना में 20% अधिक है। कुल डिस्पैच 80.4 लाख टन रहा। उत्पादन की बात करें तो यह 87.43 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 81 लाख टन से 8% ज्यादा है। कंपोजिट उत्पादन भी लक्ष्य का 133% (292.75 लाख क्यूबिक मीटर) रहा।
खास उपलब्धियां: एक नजर में
FMC प्रोजेक्ट की धमक : नॉर्थ उरीमारी CHP-SILO ने डिस्पैच में 62% की छलांग लगाई। यह 29 लाख टन से बढ़कर 47.02 लाख टन पहुंचा। रैक की संख्या भी 755 से बढ़कर 1193 (58% वृद्धि) हो गई।
क्षमता विस्तार : बिरसा/नॉर्थ उरीमारी प्रोजेक्ट की EC/CTO क्षमता को 4.5 MTY से बढ़ाकर 6 MTY किया गया।
ग्रीन एनर्जी : बलकुदरा में 5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र शुरू कर ग्रिड से जोड़ा गया।
इको-पार्क और जल संरक्षण : बलकुदरा ओबी डंप पर भव्य इको-पार्क का निर्माण पूरा हुआ है। वहीं, सीएसआर के तहत उरीमारी पंचायत में 2 अमृत सरोवर बनाए गए हैं।
महिला सशक्तीकरण : सौंदा बी साइडिंग के पास झारखंड सरकार की मत्स्य पालन परियोजना में सहयोग कर आजीविका और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
झारखंड का पहला माइनिंग टूरिज्म सेंटर बना ‘नॉर्थ उरीमारी’
बरका-सयाल क्षेत्र ने खनन के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी इतिहास रचा है। झारखंड सरकार (JTDC) और सीसीएल के बीच हुए समझौते के तहत नॉर्थ उरीमारी CHP-SILO को राज्य के पहले औपचारिक माइनिंग टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां अब देश-विदेश के पर्यटक खनन की बारीकियों को देख रहे हैं।
पर्यावरण और आजीविका पर जोर
सतत विकास के तहत बलकुदरा ओबी डंप पर इको-पार्क का निर्माण कर इसे हरित मनोरंजन स्थल बनाया गया है। वहीं सौंदा बी साइडिंग के पास मत्स्य पालन परियोजना के जरिए पर्यावरण संतुलन और महिला सशक्तीकरण को नई दिशा दी जा रही है। पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के लिए सड़क के बजाय रेल (FMC) पर फोकस किया गया है, जिससे वाहन उत्सर्जन में भारी कमी आई है। सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह के नेतृत्व में बरका-सयाल क्षेत्र ने उत्पादन के साथ-साथ सतत विकास और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए हैं। यह सफलता टीम भावना और सुदृढ़ कार्यनिष्ठा का परिणाम है।

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