angara(ranchi) उषा मार्टिन विश्वविद्यालय आटोरियम में शनिवार को पीएचडी शोधार्थियों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ। इसका उदघाटन कुलपति प्रो. मधुलिका कौशिक ने किया। ओरिएंटेशन प्रोग्राम में पीएचडी मार्गदर्शकों एवं विभागाध्यक्षों के साथ शोधार्थियों का परिचय हुआ। इसमें विभिन्न विषयों के कुल 45 शोधार्थी शामिल हुए। ये सभी देश के विभिन्न राज्यों से आए हुए है। इस अवसर पर
प्रो. कौशिक ने कहा कि अनुसंधान केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नवाचार और समाज के प्रति योगदान की यात्रा है। शोधार्थियों को अपने कार्य में गुणवत्ता और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने सभी शोधार्थियों को उषा मार्टिन विश्वविद्यालय का चयन करने के लिए धन्यवाद दिया।
डीन फैकल्टी, प्रो. अरविंद हंस ने शोधार्थियों को उनकी भूमिका एवं अपेक्षाओं के बारे में संबोधित करते हुए कहा, एक शोधार्थी में जिज्ञासा, अनुशासन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति होना आवश्यक है। शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज के लिए सार्थक योगदान देना भी है।
डीन रिसर्च डॉ. आमिर खुसरू अख्तर ने पीएचडी कार्यक्रम की संरचना एवं प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, शोध की प्रक्रिया, समय-सीमा और शैक्षणिक नियमों की स्पष्ट समझ सफल अनुसंधान के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुव्यवस्थित योजना ही शोध को सही दिशा देती है।
डीन एकेडेमिक्स, प्रो. बीएन सिन्हा ने प्रभावी शोध पूर्णता में आने वाली बाधाओं पर चर्चा करते हुए कहा, शोध में आने वाली चुनौतियाँ जैसे समय प्रबंधन, संसाधनों की कमी और विषय की अस्पष्टता को धैर्य, मार्गदर्शन और स्पष्ट दृष्टिकोण से दूर किया जा सकता है। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों ने अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया।
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