KANKE,(RANCHI) : झारखंड में लेखा पदाधिकारियों और अन्य की मिलीभगत से राजधानी सहित कई जिलों में हुई बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। बावजूद इसके इन गड़बड़ियों को रोकने को लेकर सरकार के विभिन्न विभागों के उच्चपदस्थ अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) कांके में चीफ अकाउंट ऑफिसर के कार्यरत रहते उनसे पद सोपान में नीचे बहाल लेखा पदाधिकारी को वित्तीय अधिकार प्रदान कर दिया गया है। लेखा पदाधिकारी हुलास नायक के दस्तखत को द्वितीय हस्ताक्षरकर्ता के रूप में संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ जयति सिमलाई द्वारा नामित कर दिया गया है। बताते चलें लेखा अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया में भी रिनपास में स्थापित मानदंड का अनुपालन नहीं किया गया है। दरअसल संस्थान में नियम विरुद्ध ढंग से बड़े पैमाने पर बिना क्रय समिति की बैठक किए ही जोर-शोर से खरीददारी की जा रही है। इसके लिए प्रबंधकारिणी समिति की अनुमति नहीं ली गई है। यहां जेम से होने वाला टेंडर पहले से ही सवालों के घेरे में हैं। कुछ माह पहले यह बात सामने आई थी कि जेम पोर्टल पर टेंडर संस्थान से नहीं बल्कि संबंधित अधिकारी के आवास से अपलोड किया जाता था। यह सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है। किंतु स्वास्थ्य विभाग इन सारी गड़बड़ियों पर चुप्पी साधे बैठा है। जबकि स्वास्थ सचिव ही विकास आयुक्त होने के नाते प्रबंधकारिणी समिति रिनपास कांके के अध्यक्ष भी हैं। इस पूरे प्रकरण में विभागीय सचिव सहित अन्य आला अधिकारियों की चुप्पी काफी नुकसानदायक है। दरअसल वर्तमान प्रभारी निदेशक डॉ जयति सिमलाई निदेशक की अहर्ता पूरी नहीं करती हैं। निदेशक पद के लिए प्राध्यापक होना जरूरी है। लेकिन कथित तौर पर मंत्री के एक निकट संबंधी के संरक्षण और वरदहस्त होने के कारण उनको पद पर अहर्ताओं को अनदेखा करते हुए बैठाया गया है। डॉ जयति सिमलाई की अवैध नियुक्ति, अहर्ता नहीं होने पर भी निदेशक पद पर बैठाने, उनके कार्यकाल में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर उत्तम कुमार और सूरज प्रकाश गुप्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो तथा झारखंड हाईकोर्ट में केस दर्ज कराया है। जबकि संस्थान परिसर में भर्ती महिला मरीज को तेज रफ्तार वाहन से कुचल कर मारने में सोनू मुंडा के द्वारा दायर केस में वर्तमान प्रभारी निदेशक पर मुकदमा चल रहा है। वे इस मामले में बेल पर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक से मांगा है स्पष्टीकरण* : उत्तम कुमार, सूरज प्रकाश गुप्ता और सोनू मुंडा द्वारा स्वास्थ्य विभाग को डॉ जयति सिमलाई के निदेशक पद पर रहते चल रहे केस को प्रभावित करने आदि की संभावना जताते हुए तत्काल उनको हटाने की मांग की गई है। इधर 10 अप्रैल को इन तीनों के परिवाद के आलोक में स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लेते हुए डॉ जयति सिमलाई से 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने को कहा गया है। एसीबी कोर्ट ने पहले ही अभियोजन स्वीकृति की मांग स्वास्थ्य विभाग से की है। लेकिन अभी तक इसको ठंडे बस्ते में रखा गया है। इससे मंत्री और विभाग की पारदर्शिता और सुशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल उत्तम कुमार ने रिनपास में लंबे समय से टेंडर और खरीद तथा आउटसोर्सिंग सेवाओं में कार्यरत एजेंसियां के भुगतान में गड़बड़ी आदि तथा अवैध नियुक्ति को लेकर केस किया है। बार-बार लिखित शिकायत होने के बावजूद आज तक इस मामले की जांच की जरूरत भी नहीं समझी गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत कार्य करने वालों का हो रहा आर्थिक शोषण: आउटसोर्सिंग एजेंसियों के तहत रिनपास में कार्य कर रहे मैनपावर जिसमें सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग स्टाफ, वार्ड अटेंडेंट, नर्सिंग स्टाफ आदि का कार्य करने वाले प्रबंधन के संरक्षण में आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। ये एजेंसियां उनको बाह्य स्रोत से संविदा पर लेने में मनमानी राशि वसूल रही हैं। इसमें संस्थान के अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत हैं। साथ ही विभागीय मंत्री के एक रिश्तेदार से मिल कर अच्छा चढ़ावा दिए बिना किसी को कार्य मिलना असंभव है। संस्थान के निदेशक से लेकर अन्य अधिकारियों को भी उनकी ही चौखट पर हाजिरी देनी पड़ती है। इस कारण पूरे शोषण का नेटवर्क वहीं से संचालित हो रहा है। इस कारण सिक्योरिटी सर्विस देने वाली पूर्व की एजेंसी जिसने पूरे कार्यकाल में कभी भी न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ और बोनस राशि का पूर्ण भुगतान नहीं किया उसपर कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। मजेदार बात यह है कि इसको लेकर स्वयं कांग्रेस पार्टी कांके प्रखंड के अध्यक्ष संजर खान ने मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन वह ठंडे बस्ते में पड़ी रह गई। इधर हाल ही में चयनित नई सिक्योरिटी एजेंसी भी नए गार्ड से 30 से 50 हजार तक की उगाही कर रही है। जबकि पुराने गार्ड्स से 15 हजार रूपए वसूले जा रहे हैं। वहीं नर्स से डेढ़ से दो लाख और सफाईकर्मी से 30 से 50 हजार लिया गया है। हाल यह है कि सुरक्षा सेवा में बहाल होने के लिए अत्यावश्यक पुलिस विभाग से लिया जाने वाला आचरण प्रमाण पत्र भी नहीं लिया जा रहा है। वैसे लोगों को सेवा में रखा जा रहा है जिनका पूर्व का आपराधिक इतिहास रहा है। ऐसे में सरकार के नाक के नीचे खुलेआम स्थानीय सफाईकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों तथा नर्सिंग स्टाफ का आर्थिक शोषण हो रहा है।
रिनपास में चीफ अकाउंट ऑफिसर की जगह लेखा पदाधिकारी को दे दिया वित्तीय अधिकार, राज्य में जारी वित्तीय घोटाले के बावजूद सुध नहीं ले रहे अधिकारी
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