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| पत्रकारों से बातचीत करते विधायक जयराम महतो, साथ में हैं राजू महतो व अन्य। |
पुरुलिया से लौटकर अनूप महतो : झारखंड की राजनीति में 'टाइगर' जयराम महतो की पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने जिस तरह से स्थापित दलों की नींद उड़ाई है, अब उसकी गूंज पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में भी सुनाई देने लगी है। पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे कुर्मी-बहुल क्षेत्रों में जेएलकेएम की सक्रियता ने आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।
पिछले दो चुनावों में जिस 'जंगलमहल' इलाके में एनडीए (भाजपा) ने अपनी पैठ मजबूत की थी, वहां अब जेएलकेएम का 'झारखंड मॉडल' सेंधमारी करता दिख रहा है।
राजू महतो का दांव : आजसू के 'गढ़' में सेंधमारी
जेएलकेएम के पश्चिम बंगाल प्रभारी राजू महतो इन दिनों पुरुलिया के गांवों में डेरा डाले हुए हैं। उनका दावा है कि आजसू (AJSU) जैसी पार्टियां, जो कभी इस बेल्ट में मजबूत हुआ करती थीं, अब हाशिए पर हैं।
आजसू पर प्रहार : राजू महतो का कहना है कि जो आजसू बागमुंडी जैसी सीटों पर दो-दो बार मजबूती से चुनाव लड़ चुकी है, आज वह एक उम्मीदवार तक खड़ा करने की स्थिति में नहीं दिख रही।
दलों में उथल-पुथल : जेएलकेएम के बढ़ते प्रभाव का ही असर है कि जयपुर (पुरुलिया) से टीएमसी के दिग्गज नेता दीप ज्योति सिंहदेव जैसे बड़े चेहरे अब जयराम महतो की विचारधारा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
कुर्मी वोट बैंक: क्यों बढ़ रही है बेचैनी
पश्चिम बंगाल का पुरुलिया बेल्ट भाषाई और सांस्कृतिक रूप से झारखंड के काफी करीब है। यहां कुर्मी-महतो समुदाय की आबादी निर्णायक भूमिका में है।
क्या एनडीए-ममता को नुकसान पहुंचा पाएंगे जयराम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेएलकेएम की एंट्री से सबसे ज्यादा नुकसान एनडीए को हो सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि जो युवा वोट बैंक हिंदुत्व और विकास के नाम पर भाजपा के साथ गया था, वह अब 'महतो अस्मिता' के नाम पर जयराम की ओर शिफ्ट हो सकता है।
वहीं, टीएमसी के लिए राहत की बात यह हो सकती है कि विपक्षी वोटों का बंटवारा हो, लेकिन दीप ज्योति सिंहदेव जैसे नेताओं का जेएलकेएम के संपर्क में होना ममता बनर्जी के लिए भी खतरे की घंटी है।
पश्चिम बंगाल में जेएलकेएम की एंट्री से उथल-पुथल मचना तय है। आजसू समेत कई बड़े नेता हमारे संपर्क में हैं। लोगों का जो समर्थन मिल रहा है, वह स्पष्ट करता है कि इस बार परिणाम चौंकाने वाले होंगे। -राजू महतो, बंगाल प्रभारी, जेएलकेएम
आगे क्या...
अब देखना यह होगा कि क्या जयराम महतो की पार्टी झारखंड की तरह बंगाल में भी 'वोट कटवा' के बजाय एक 'वोट गेनर' के रूप में उभर पाती है या नहीं। यदि राजू महतो स्थानीय असंतोष को वोटों में बदलने में सफल रहे, तो पुरुलिया की राजनीति का केंद्र कोलकाता नहीं, बल्कि सीमा पार की लहर तय करेगी।


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