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| दुर्घनाग्रस्त वैन के पास जुटी भीड़। |
कबाड़ बन चुकी वैन को चलाया जा रहा था
नवभास्कर की पड़ताल में गाड़ी की जो स्थिति सामने आई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस गाड़ी (सवारी वाहन) में बच्चों को ढोया जा रहा था, उसका अस्तित्व कागजों पर सालों पहले खत्म हो चुका था।
* फिटनेस: 11 साल पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी।
* टैक्स: पिछले 10 साल से बकाया था।
* इंश्योरेंस: 11 साल पहले ही खत्म हो गया था।
* उम्र: गाड़ी 21 साल पुरानी थी, जिसे तकनीकी रूप से सड़क पर चलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी।
ब्रेक फेल होते ही मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, वैन पलमरुआ से बच्चों को लेकर स्कूल लौट रही थी। नईयाडीह मोड़ के पास अचानक गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया। ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और गाड़ी सीधे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के बाद ड्राइवर मौके से फरार हो गया। घायल बच्चों में पांचवीं कक्षा की छात्रा अंशु कुमारी सहित अन्य शामिल हैं, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं।
परिवहन विभाग और स्कूल की मिलीभगत?
यह हादसा परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
* मूकदर्शक बना विभाग: बिना फिटनेस और इंश्योरेंस के 21 साल पुरानी गाड़ी सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी? क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
* मुनाफे का खेल: निजी स्कूल चंद पैसों के फायदे के लिए बच्चों की जान जोखिम में डालकर कंडम वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
* नाममात्र की कार्रवाई: तिसरी के बीपीओ ने कहा कि स्कूल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ नोटिस जारी करने से सुधार नहीं होगा, सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
नवभास्कर नोट: अभिभावकों को भी जागरूक होना होगा। अपने बच्चों को स्कूल वैन में भेजने से पहले वाहन की स्थिति और कागजातों की जांच जरूर करें। आपकी जागरूकता ही आपके बच्चे की सुरक्षा की पहली ढाल है।

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