फोटो : वार्ता के बाद लिखित आश्वासन पत्र देते सीआईपी के प्रशासकीय पदाधिकारी। फोटो: शव के साथ सीआईपी में धरना देते ग्रामीण एवं अन्य। फोटो : भीख मांगते गार्ड्स से मिलते कनके विधायक सुरेश कुमार बैठा। कांके,(रांची)। केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) कांके में रविवार को पेड़ काटने के दौरान हुए हादसे में सफाईकर्मी बिरसा कच्छप की दुखद मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। देर रात तक मृतक बिरसा कच्छप के सहकर्मी सफाईकर्मीगण, कांग्रेस, भाजपा और आदिवासी संगठन के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर निदेशक आवास तथा कांके थाना का घेराव किया। साथ ही कांके थाना में निदेशक, प्रशासकीय पदाधिकारी और एजेंसी पर एफआईआर के लिए परिजनों की ओर से लिखित शिकायत भी दी थी। इधर सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीण और सहकर्मी संस्थान के मेन गेट पर शव के साथ अपराह्न लगभग तीन बजे से धरने पर बैठ गए। इसकी सूचना पाकर कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार बैठा, प्रखंड अध्यक्ष संजर खान , जनजाति सुरक्षा मंच के प्रवक्ता सह मुखिया संघ झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सोमा उरांव, भाजपा नेता कमलेश राम, जिप सदस्य किरण देवी, लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू, प्रमोद गुप्ता, लालचंद सोनी सहित अन्य नेता उनके समर्थन में पहुंच गए। इधर कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा और डीएसपी अमर कुमार पांडेय तथा इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार रजक की पहल पर संस्थान के प्रशासकीय पदाधिकारी डॉ सुनील सूर्यवंशी के बीच वार्ता हुई। इसमें एजेंसी के माध्यम से मृतक के भाई प्रदीप कच्छप को 10 लाख का मुआवजा राशि का भुगतान करने की लिखित सहमति बनी। साथ ही उसकी बहन को बिरसा कच्छप के जगह कार्य पर एजेंसी में रखा जाएगा। नाबालिग बेटी तृषा की पढ़ाई में सहयोग का भी भरोसा दिया गया। लेकिन इस समझौते के बाद एजेंसी पर किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है। विधायक सुरेश कुमार बैठा ने कहा कि अनाथ हो चुकी बच्ची की शिक्षा को वे सुनिश्चित करवाएंगे। साथ ही परिवार को आवास भी दिलवाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान और निजी एजेंसियां संस्थान के कर्मियों का भविष्य में किसी प्रकार शोषण नहीं करें इस पर भी नजर रखी जाएगी। बताते चलें सफाईकर्मी से पेड़ की डालियां कटवाना नियमों की सीधा सीधा उल्लंघन है, क्योंकि न तो उनको पेड़ काटने की विशेषज्ञता है और न ही सुरक्षा मानकों का ही ख्याल रखा गया था। लिखित आश्वासन तथा दो लाख का भुगतान होने के उपरांत परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर वापस गए। *सुरक्षाकर्मियों ने मांगा भीख :* संस्थान से निकाले गए 156 सुरक्षाकर्मियों ने मंगलवार को भी अपना आंदोलन जारी रखा। उन्होंने सोमवार को आसपास के दुकानदारों एवं राहगीरों से भीख मांग कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, महानिदेशालय एवं संस्थान के निर्णय का विरोध जताया। कहा कि इस निर्णय से वे लोग सड़क पर आकर परिवार के साथ भीख मांगने को मजबूर हैं। जिन होमगार्ड्स को राज्य सरकार ने नियुक्त किया है उनको कहीं अन्य भी ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। लेकिन केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार ने भी हमें बेरोजगार करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा। हमारे स्थानीय विधायक और सांसद से भी कोई सलाह नहीं ली गई। कहा कि विधायक, सांसद, प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य सभी हम स्थानीय , आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समाज के गार्ड्स के साथ खड़े हैं। खुलकर हमारी पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं। इसपर राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। कहा कि हमारा आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। विधायक सुरेश कुमार बैठा ने कहा कि वे गार्ड्स की पुनर्बहाली होने तक शांतिपूर्ण आंदोलन को अपना समर्थन जारी रखेंगे।
सीआईपी में ग्रामीणों ने शव के साथ दिया धरना, एजेंसी करेगी 10 लाख का मुआवजा भुगतान
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