GA4-314340326 एक साल बाद सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू

एक साल बाद सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू

बिजली उत्पादन का शुभारंभ करते अधिकारी
angara(ranchi)  एक साल बाद सोमवार से सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना से बिजली का उत्पादन शुरू हुआ। पावर हाउस एक से बिजली उत्पादन शुरू हो गया। जबकी सोमवार देर रात तक पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ तकनीकी खराबी के कारण पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू नही हो सका है। दो दिनों से लगातार टेस्टिंग चल रहा था। ज्ञात हो कि 6 मार्च 2025 को पावर हाउस एक के पास ट्रेस रेक टूट गया था। जिससे बिजली उत्पादन ठप्प हो गया। परियोजना प्रबंधक संजय सिंह ने बताया कि शाम में पावर हाउस एक से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया है। थोड़ा तकनीकी प्रोब्लम के कारण पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू नही हुआ है। देर रात तक प्रयास होगा पावर हाउस दो से बिजली उत्पादन शुरू हो जाए। गेतलसूद डैम का जलस्तर 33 फीट है। इसलिए फिलहाल चैबीसों घंटा बिजली का उत्पादन किया जाएगा। पावर हाउस दो की तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए लिए परियोजना प्रबंधक संजय सिंह, वरीय प्रबंधक(सिविल) सुरेश प्रसाद, प्रबंधक सिविल शंभू शरण व कृष्णा प्रसाद, प्रदीप साहू आदि लगातार पावर हाउस दो में कैंप किये हुए है। 

क्या है ट्रेस रेक..ट्रेस रेक बिजली उत्पादन के लिए पानी छोड़ने का एक प्रमुख साधन है। इसका निर्माण 1976 में किया गया था। समय समय इसका रिपेयर होता रहा है। बिजली उत्पादन के दौरान ट्रेस रेक में दोनों तरफ से 2000 क्यूसिक पानी का प्रेशर रहता है। ट्रेक रेक का लाइफ पूर्ण हो गया था जिस कारण मार्च माह में अचानक से टर्बाइन बंद करने के दौरान पानी के प्रेशर से यह धवस्त हो गया। ट्रेस रेक का सिविल स्ट्रक्चर व जाली टूट गया। जिस कारण पानी का ठहराव बंद हो गया। परियोजना निर्माण के समय इसका लाइफ 30-35 साल बताया गया था। चूंकी सिकिदिरी में एक ही सीरिज में एक ही पानी से दो जगहों सिकिदिरी घाटी स्थिति पावर हाउस एक व हुंडरू फाल स्थित पावर हाउस दो से बिजली का उत्पादन करती है। दोनों जगहों पर 65-65 मेगावाट कुल 130 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। ट्रेस रेक पानी के मेन लाइन में है इसलिए इसके क्षतिग्रस्त होने से दोनों जगहों से बिजली का उत्पादन ठप्प् हो गया।            

पचास साल पुराने डिजाइन के कारण हुई देरी

पचास साल पुराने ट्रेस रेक के डिजाइन को मरम्मत कराने के लिए परियोजना को काफी मशक्कत करना पड़ा। परियोजना के पास इसका कोई डिजाइन नही था। डिजाइन के लिए आईआईटी रूड़की, आईएसएम धनबाद, एनआईटी जमशेदपुर, बीआईटी मेसरा, मुंबई सहित अन्य उच्च तकनीकी संस्थान से विस्तृत चर्चा के उपरांत आईआईटी रूड़की को कंसलटेंट नियुक्त् किया गया।

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