GA4-314340326 बालमुकुंद स्पंज फैक्ट्री में एक हफ्ते में दूसरी मौत, सुरक्षा ताक पर रख मजदूरों से लिया जा काम

बालमुकुंद स्पंज फैक्ट्री में एक हफ्ते में दूसरी मौत, सुरक्षा ताक पर रख मजदूरों से लिया जा काम

एंबुलेंस में पड़ा मजदूर का शव

ब्यूरो चीफ / गिरिडीह (झारखंड): औद्योगिक सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संचालित हो रही बालमुकुंद स्पंज एंड आयरन फैक्ट्री (मंझलाडीह) एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार की नाइट शिफ्ट के दौरान शनिवार सुबह हुए एक दर्दनाक हादसे ने 35 वर्षीय मजदूर मुकेश मंडल की जान ले ली। विडंबना यह है कि एक सप्ताह के भीतर इस फैक्ट्री में यह दूसरी मौत हुई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

दुर्घटना के बाद हृदयविदारक था मंजर 

बल्हो गांव निवासी मुकेश मंडल, जो फैक्ट्री में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे, ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धनबाद ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद जो मंजर दिखा, वह हृदयविदारक था। एक तरफ बिलखती विधवा और बच्चे थे, तो दूसरी तरफ पोकलेन मशीनों से जाम किया गया फैक्ट्री का मुख्य द्वार।

आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के बजाय, हादसों के बाद 'मुआवजे का खेल' खेलकर कानूनी कार्रवाई से बच निकलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली मौत के बाद भी लाखों के मुआवजे और पेंशन का वादा कर मामला रफा-दफा कर दिया गया था, लेकिन सुरक्षा में कोई सुधार नहीं हुआ।

प्रबंधन की संवेदनहीनता से भारी आक्रोश 

घटना के बाद फैक्ट्री परिसर छावनी में तब्दील हो गया। जहां मुफस्सिल थाना की पुलिस और आक्रोशित ग्रामीण घंटों जनरल मैनेजर परशुराम तिवारी का इंतजार करते रहे, वहीं प्रबंधन ने खुद को सुरक्षा गार्डों के घेरे में कैद कर लिया। मृतक की पत्नी ने कैमरे के सामने रोते हुए प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।

फैक्ट्री के बाहर खड़े पुलिस जवान।

उग्र आंदोलन की दी चेतावनी 

  JLKM नेता नागेंद्र चंद्रवंशी ने प्रबंधन के अड़ियल रवैये के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। JMM युवा मोर्चा के  नेता हसनैन अली ने जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

मुआवजे से मुकदमे का सौदा कर लेता है प्रबंधन 

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन हर बार पैसे देकर मजदूरों की जान का सौदा करता है। इस बार मांग केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की है जिनकी लापरवाही के कारण मुकेश जैसे मजदूर हर दिन मौत के साये में काम करने को मजबूर हैं।

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