GA4-314340326 आदित्य साहू बने झारखंड भाजपा अध्यक्ष, जानिए इसके राजनीतिक मायने

आदित्य साहू बने झारखंड भाजपा अध्यक्ष, जानिए इसके राजनीतिक मायने

13 जनवरी को प्रदेश भाजपा कार्यालय में नामांकन दाखिल करते आदित्य साहू।
रांची : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड में बड़ा सांगठनिक बदलाव करते हुए राज्यसभा सांसद प्रो. आदित्य साहू को प्रदेश का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे बाबूलाल मरांडी का स्थान लेंगे। मरांडी ने कहा कि आदित्य साहू एक जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं। उनके लंबे सांगठनिक अनुभव का लाभ पूरी पार्टी को मिलेगा। उनके नेतृत्व में भाजपा झारखंड में और अधिक सशक्त होकर उभरेगी।
       बताते चलें कि उनका चयन निर्विरोध हुआ है। झारखंड भाजपा के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया के तहत 13 जनवरी को प्रो. साहू ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके अलावा किसी और ने नामांकन पत्र भरा, इसके बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया था। केंद्रीय मंत्री और चुनाव पर्यवेक्षक जुएल ओराम की मौजूदगी में इस प्रक्रिया को पूरा किया गया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में उन्हें झारखंड भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। अब उन्हें पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर बड़ा भरोसा जताया है। बाबूलाल मरांडी, जो अब तक इस पद पर थे, वर्तमान में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में सक्रिय रहेंगे।

केंद्रीय समिति के लिए कोड़ा दंपति सहित 21 चयनित 

प्रदेश अध्यक्ष के अलावा झारखंड से भाजपा की केंद्रीय समिति के लिए 21 नेताओं का चयन किया गया। चयन में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और उनकी पत्नी गीता कोड़ा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। चयनित नेताओं में कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, अभयकांत प्रसाद, प्रो. यदुनाथ पांडेय, पशुपतिनाथ सिंह, रवींद्र कुमार राय, दिनेशानंद गोस्वामी, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, समीर उरांव, अनंत ओझा, गीता कोड़ा, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानुप्रताप शाही और डॉ. जीतूचरण राम शामिल हैं।

जानिए, आदित्य साहू कौन हैं?

आदित्य साहू झारखंड भाजपा के एक कर्मठ और जमीनी नेता माने जाते हैं। उनके बारे में प्रमुख बातों को जानना जरूरी है।

 * वर्तमान पद: राज्यसभा सांसद (2022 से) और अब झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष।

 * मूल निवासी: वे रांची जिले के ओरमांझी (कुचू गांव) के रहने वाले हैं।

 * शिक्षा और करियर: उन्होंने एम.कॉम किया है और राजनीति में आने से पहले वे रामटहल चौधरी कॉलेज में प्रोफेसर थे।

 * जातीय समीकरण: प्रो. साहू पिछड़ा वर्ग (OBC) के वैश्य समाज से आते हैं, जो झारखंड की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक है।

इस नियुक्ति के राजनीतिक मायने

 * OBC कार्ड: बाबूलाल मरांडी (आदिवासी चेहरा) के बाद भाजपा ने अब एक ओबीसी चेहरे पर दांव खेला है। यह राज्य की बड़ी आबादी को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

 * संगठन पर पकड़: आदित्य साहू लंबे समय तक प्रदेश महामंत्री के रूप में संगठन का काम देख चुके हैं। उन्हें राज्य के कोने-कोने में कार्यकर्ताओं के साथ काम करने का गहरा अनुभव है।

 * स्वच्छ छवि: साहू की छवि एक बेदाग और अनुशासनप्रिय नेता की रही है, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी को कम करने में मदद मिल सकती है।

विपक्षी व सहयोगी दलों की प्रक्रिया 

मरांडी की विफलता पर मुहर: झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडेय कहा कि भाजपा ने स्वीकार कर लिया है कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में वह राज्य में विफल रही है। बार-बार अध्यक्ष बदलना यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर भारी असंतोष और गुटबाजी है। चेहरे बदलने से झारखंड की जनता का भरोसा भाजपा पर नहीं लौटने वाला।

ओबीसी वोट बैंक की राजनीति: कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा को अब आदिवासियों का साथ नहीं मिल रहा, इसलिए वह ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश कर रही है। लेकिन, झारखंड के पिछड़ा वर्ग के लोग जानते हैं कि भाजपा ने उनके आरक्षण और अधिकारों के लिए क्या किया है। आदित्य साहू जी को सिर्फ एक 'मोहरे' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

गठबंधन के लिए सकारात्मक: भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि आदित्य साहू जी एक सुलझे हुए नेता हैं। एनडीए के समन्वय को और मजबूती मिलेगी। हम मिलकर राज्य के मुद्दों पर संघर्ष करेंगे।





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