GA4-314340326 कुदाझरिया: आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची, बिजली के अभाव में दो पीढ़ी रही अनपढ़

कुदाझरिया: आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची, बिजली के अभाव में दो पीढ़ी रही अनपढ़

उदघाटन करती रिया तिर्की
अनिल कुमार चौधरी/ Angara(ranchi)  अनगड़ा प्रखंड के हरातू पंचायत के शत प्रतिशत आदिवासी बहुल गांव कुदाझरिया में आजादी के बाद पहली बार सोमवार को बिजली की रोशनी पहुंची। गांव में बिजली पहुंचने पर गांववालों ने जमकर जश्न बनाया। ढोल मांदर के साथ नाचते गाते ग्रामीण महिला पुरूष नया ट्रांसफार्मर का उदघाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। कुदाझरिया गांव में 15 परिवार भोगता(आदिवासी) का रहता है। सभी दिहाड़ी मजदूर है। 25 केवीए के ट्रांसफार्मर का उदघाटन खिजरी विधायक राजेश कच्छप की पत्नी रिया तिर्की ने सोमवार को किया। रिया तिर्की को ग्रामीणों ने फूलमालाओं से लाद दिया। इस गांव के बगल में ही सिकिदिरी जलविद्युत परियोजना से बिजली का उत्पादन होता है जिससे पूरा राज्य रौशन हो रहा है लेकिन इस गांव तक बिजली पहुंचने में 78 साल लग गया। 

कुदाझरिया में बिजली पहुंचने पर मिली संतुष्टि: विधायक राजेश कच्छप

ग्रामीणों के साथ खुशी मानती रिया तिर्की 
कुदाझरिया गांव में बिजली पहुंचाने में खिजरी विधायक की उल्लेखनीय भूमिका रही। विधायक राजेश कच्छप बताते है काफी दुख होता था कि कुदाझरिया गांव में बिजली नही पहुंचा पाया। लेकिन लगातार प्रयासरत रहा। गांव के लोगों ने भी भरपूर सहयोग दिया। गांव में बिजली की रोशनी पहुंचने पर अब संतुष्टि मिली है। ज्ञात हो कि कुदाझरिया गांव की भौगोलिक बनावट काफी दुर्गम है। पहाड़ के उपर में यह गांव बसा हुआ है। आवागमन के लिए कोई रास्ता नही है। पैदल ही गांव तक सिकिदिरी मुख्य मार्ग से डेढ किमी की दूरी तय करके जाना होता है। बिजली ले जाने के लिए भी एक किमी पहले ही गंझूटोली में ट्रांसफार्मर लगाया गया। इसके बाद कवर केबल के माध्यम से गांव तक बिजली ले जाया गया। चारों तरफ पेड़ पौधा होने के कारण गांव तक 11 हजार वोल्ट तार जाना संभव नही था। 

बिजली के अभाव में गांव की दो पीढ़ी अनपढ़ बनी।
नारियल फोड़कर उदघाटन करते
गांव के दिलेश्वर भोगता, फूलचंद भोगता, आशोमनी देवी, करमी देवी, रामकुमार गंझू, कुलेश्वर गंझू, मंशू गंझू, छटू गंझू बताते है बिजली के अभाव में हमारा जीवन नरक हो गया था। गांव में कोई शादी करने को तैयार नही होता था। हालांकि श्रमदान करके पहाड़ को काटकर चलने लायक रास्ता तो बना दिया लेकिन बिजली की कमी हमेशा टीस देती थी। हमलोग मजदूर है इसलिए बिजली की लड़ाई भी नही लड़ सके। कुछ साल पहले तक तो किरोसिन तेल से ढिबरी व लालटेन जलाकर घर में रौशनी लाते थे। लेकिन हाल के समय में बगल के गंझूटोली गांव में मोबाइल व इमरजेंसी लाइट, सोलर पैनल लाइट के माध्यम से घर में रौशनी करते रहे। बिजली के अभाव के कारण ही हमारी दो पीढ़ी अनपढ़ रही। सभी मजदूर बने।
 
पूर्व विधायक रामकुमार पाहन ने कराया सर्वे: पारसनाथ भोगता
अतिथियों का स्वागत करते
भोगता समाज के अगुआ व सहेदा के ग्रामप्रधान पारसनाथ भोगता बताते है इन्होंने गांव तक बिजली लाने का काफी प्रयास किया था। पूर्व विधायक रामकुमार पाहन को गांव में लाकर बिजली का सर्वे भी कराया था। लेकिन रामकुमार पाहन के चुनाव हारने के बाद प्रयास आगे नही बढ़ सका। कुदाझरिया गांव की इस खुशी में शामिल होने के लिए प्रखंड अध्यक्ष एतवा उरांव, उपप्रमुख जयपाल हजाम, विधायक प्रतिनिधि श्रवण मुण्डा, राजेंद्र मुण्डा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवदास गोस्वामी, फारूक खान, छोटेलाल महतो, साकिर अंसारी, कुलेश्वर मुंडा आदि शामिल हुए।

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