GA4-314340326 JSCPCR : अध्यक्ष को राजनीतिक दल ज्वाइन करने पर हटाया, तो सदस्यों पर मेहरबानी क्यों

JSCPCR : अध्यक्ष को राजनीतिक दल ज्वाइन करने पर हटाया, तो सदस्यों पर मेहरबानी क्यों

 झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग संवैधानिक बॉडी है या राजनीतिक अखाड़ा

अजय साह को एक राजनीतिक दल में ज्वाइन करने पर हटाया गया

उज्जवल प्रकाश तिवारी पुष्पल और रुचि कुजूर बतौर सदस्य लेते रहे हैं पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा

कांग्रेस के कार्यक्रम में उज्ज्वल प्रकाश तिवारी।

Ranchi (Jharkhand) : JSCPCR यानी झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (Jharkhand State Commission for Protection of Child Rights) एक संवैधानिक बॉडी है। अब यह अध्यक्ष विहीन हो गया है। इसके दो सदस्य उज्ज्वल प्रकाश तिवारी (Ujwal Kumar Tiwari), जो कांग्रेस पार्टी (Congress Party) से आएं हैं और रुचि कुजूर (Ruchi Kujur) जो झारखंड मुक्ति मोरचा (JMM) से जुड़ी हैं के कारनामे से आयोग की लगातार बदनामी हो रही है। आपको बताएं कि बाल कल्याण समिति रांची के अध्यक्ष रहे अजय साह को महिला, बाल विकास एवं सुरक्षा विभाग की ओर से इसलिए निकाल दिया, क्योंकि उन्होंने एक राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण की थी। विभाग की यह कार्रवाई 11 सितंबर 2023 को अवर सचिव सरोजिनी कुमारी सिंह (Sarojini Kumari Singh) के हस्ताक्षर से अधिसूचना जारी की गयी। लेकिन उज्ज्वल प्रकाश तिवारी जो राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा में शामिल होकर राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा बने, बल्कि फेसबुक लाइव और एक्स पर अपनी तस्वीरें और वीडियो भी शेयर की। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी और सरकार के कई कार्यक्रमों में लगातार ये शिरकत करते रहे हैं। 

झामुमो के कार्यक्रम में मंच शेयर करती रुचि कुजूर।

आरोप के बावजूद दोनों अपने पद पर विराजमान 

उज्ज्वल प्रकाश तिवारी और रुचि कुजूर ने खूंटी में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष तनुश्री सरकार (Tanushree Sarkar) ने रजनी कुमारी (पति स्व. विमल कुमार सिंह) के मामले में षड़यंत्र कर पुलिस जांच एवं विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा कर दी। यह मामला फिलहाल कुटूंब न्यायालय में भी लंबित है। लंबित मामले म आयोग के उज्ज्वल प्रकाश तिवारी और रुचि कुजूर ने एकपक्षीय रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। इस पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष काजल यादव ने 30 अगस्त 2023 को पत्र लिख कर कहा था कि आयोग खूंटी के तनुश्री मामले में नियमानुसार कोई कार्रवाई नहीं कर सकते हैं और न ही हस्तक्षेप कर सकते हैं। बाल कल्याण समिति खूंटी की अध्यक्ष पर रिश्वत लेने का जो आरोप इन दोनों ने लगाया था, वह प्रमाणित नहीं हो सकता है। तत्कालीन अध्यक्ष ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 74 का सरासर उल्लंघन पाया। इसके बाद भी ये दोनों अपने पद पर बने हुए हैं।

विनोद सिंह ने भेजा था मानहानि का नोटिस 

जानकारी के अनुसार रुचि कुजूर और आभा अकिंचन ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय में जाकर कई जांच की। इससे संबंधित तस्वीर भी सोशल मीडिया में प्रकाशित किया गया। उज्ज्वल प्रकाश तिवारी और रुचि कुजूर के खिलाफ एडवोकेट विनोद सिंह ने मानहानि का नोटिस भी भेजा था। यह नोटिस तनुश्री सरकार मामले में भेजी गई थी। इसमें दोनों पर मानहानि का मुकदमा करने की बातें कही गई थीं। यह कहा गया था कि गलत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उनके मुवक्किल की छवि खराब करने की कोशिश की गई। इसके अलावा कई और कारगुजारियों पर ये दोनों संलग्न हैं, जिन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है। यानी कुल मिला कर झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एक राजनीतिक अखाड़ा बन कर रह गया है।


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