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| सोनार टोली में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा |
तारकेश्वर महतो/silli(ranchi) बंता में कई दशकों से पारंपरिक तरीके से हो रही है मां दुर्गा की पूजा पूरे गांव में सात जगहों पर होती है। सार्वजनिक दुर्गा पूजा के अलावे सभी अलग-अलग जाति के लोग अलग-अलग पूजा पंडाल बनाकर पूजा अर्चना करते है।
पूजा पंडाल का निर्माण सोनार टोला, लोहरा टोला, महतो टोला, चौधरी टोला, बंता मध्य टोला में दो पूजा पंडाल है। सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल बाबू टोला में निर्माण किया गया है। सूरज सोनार ने बताया कि बेशक गांव में सभी समाज के लोगों ने अपने अपने लिए माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की है। लेकिन यही हमारी एकजुटता का भी प्रतीक है। सामूहिक सहयोग से गांव के सभी सातों पंडाल में पूजा संपन्न कराया जाता है। पूरे गांव में किसी भी प्रकार का राग-विद्वेश नही है। हमारी एकजुटता को देखने बाहर से भी श्रद्धालु आते है।
सामाजिक समरसता का प्रतीक है बंता गांव
पूजा अर्चना में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है। सभी एक दूसरे के पूजा पंडाल पर जाकर पूजा अर्चना करते हैं एवं भाईचारा के संबंध बखूबी निभा रहे है। सभी पूजा पंडाल में दो पंडित पूजा को संपन्न करा रहे है। गांव के जयन्त भगत ने बताया कि आज भी धूमधाम के मंदिरों में पूजा अर्चना की जाती है। इन्होंने कहा कि सभी समाज के लोग एक सभी पंडालों में जाकर माता का दर्शन कर गांव में सुख समृद्धि और आपसी भाईचारा के लिए प्रार्थना करते है।
आजीविका के लिए गांव से बाहर गया परिवार इसी समय आता है वापस
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कुणाल रॉय धनबाद में एचडीएफसी बैंक में शाखा प्रबंधक पद पर कार्यरत कुणाल रॉय बताते है "प्रतिवर्ष दुर्गा पूजा के समय गांव पहुंचते है। पूरे परिवार के साथ दुर्गा पुजा मनाते है। पूरे गांव में उत्सव का माहौल रहता है"। पूजाके अवसर में गांव के जो भी व्यक्ति बाहर रोजगार करने के लिए गए हुए है। वह अवश्य ही दुर्गा पूजा में अपने घर पहुंचते है। पूजा के अवसर पर सभी अपने रिश्तेदारों को भी नियंत्रण देते है। पूरे गांव में सभी के घरों में दुर्गा पूजा के अवसर पर रिश्तेदारों का आना जाना लगा रहता है।
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एक ही दिन एक ही जलाशय में माता की सभी प्रतिमाओं का होता है विसर्जन
बंता के पूर्व मुखिया सुशील सिंह मुण्डा बताते है गांव में वैमनस्यता नही रहे इसलिए सामूहिक रूप से एक ही समय, एक ही दिन व एक ही जलाशय रघु बांध में माता की प्रतिमाओं का एक साथ विसर्जन किया जाता है। विसर्जन जुलूस में गांव के सभी महिला पुरूष व बच्चें शामिल होते है। मूर्ति का विसर्जन गांव के ही रघु बांध में किया जाता है। इस गांव में पूजा की तैयारी 2 माह पूर्व से ही प्रारंभ कर दी जाती है।
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