![]() |
| केज में मरी हुईं मछलियों को देखते जिला मत्स्य पदाधिकारी। |
दूसरे दिन भी मछलियां मरीं
रविवार को भी केज में जो थोड़ी-बहुत तिलापिया (Tilapia) नस्ल की मछलियां थीं, वो सभी मर गईं। गडढा खोदकर मरी हुईं मछलियों को गाड़ दिया गया। मालूम हो कि शनिवार की सुबह में गेतलसूद डैम के पांच केज में करीब सात हजार तिलापिया मछलियां मर गई थीं। इससे पहले जून 2023 में आए भयंकर तूफान से छोटा साइज (200 ग्राम) व बड़ा साइज (एक किग्रा) की दो हजार मछलियां मरी थीं। जून 2021 में अज्ञात कारणों से तीन सौ ग्राम साइज की दस हजार मछलियों की मौत हो गई थी।
प्रथम दृष्टया ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण माना जा रहा
जिला मत्स्य पदाधिकारी डॉ. अरूप चौधरी ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच से पता चलता है कि पानी में आक्सीजन की कमी के कारण मछलियों की मौत हुई है। सभी तिलापिया एक से ढाई किग्रा साइज की थी। जबकि केज के एक बाक्स का साइज सवा दो सौ स्क्वायर फीट व जाल की गहराई 12 फीट होती है। इस साइज के बाक्स में छह सौ ग्राम साइज का सात हजार तिलापिया रखी जा सकती हैं। लेकिन, वजन बढ़ने के कारण मछलियों के लिए जगह छोटा हो गया। इस कारण दम सांस लेने में कठिनाई होने लगी और दम घुटने से मछलियों की मौत हो गई। संख्या कम होने के कारण केज में ही फंगास, कालगोस व कतला प्रजाति की मछलियां पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
![]() |
| मरने के बाद मछलियों के मुंह और गलफर खुल गए थे। |
भोला महतो को फिर से जीरा और चारा मिलेगा
जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि भोला महतो को विभाग की ओर से फिर से एक लाख मछली का जीरा, उसका भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही आधुनिक तरीके से मछली पालन करने के बारे में जानकारी उपलब्ध कराया जाएगा। जिससे भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृति ना हो।
भोला एक दशक से कर रहे मछली पालन
भोला महतो पिछले एक दशक से केज के माध्यम से मछली पालन कर रहा है। तिलापिया मछली को “एक्वाटिक चिकन”भी बोला जाता है। रांची व आसपास के बाजारों में तिलापिया मछली की काफी मांग है। कांटा कम होने के कारण यह मछली सभी का पसंद बना हुआ है।
सुनिए क्या कह रहे जिला मत्स्य पदाधिकारी: सोमवार को सौंपनी है जांच रिपोर्ट
Breaking: Fish died due to lack of oxygen in Getalsud Dam, investigation started


एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.