गिरिडीह : जिले के सुदूरवर्ती गांवा, तिसरी और देवरी प्रखंड के हजारों छात्र-छात्राओं का उच्च शिक्षा का सपना एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। 38 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला आधुनिक डिग्री कॉलेज भूमि विवाद में फंस गया है और पिछले 4 महीने से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।
मई 2025 में गुमगी पंचायत के मचनियाटांड में गांवां-गिरिडीह मुख्य मार्ग पर 6 एकड़ भूमि पर डिग्री कॉलेज का निर्माण आनन-फानन में शुरू कर दिया गया। प्रशासनिक ब्लॉक, साइंस-आर्ट्स ब्लॉक, रिसर्च सेंटर, कंप्यूटर लैब, गर्ल्स हॉस्टल और प्लेग्राउंड डेढ़ साल में तैयार होना था। इससे क्षेत्र की बेटियों की पढ़ाई बीच में छूटने की समस्या खत्म होनी थी।
लेकिन विभाग ने न शिलान्यास कराया, न ग्रामसभा की, न ही जमीन के मूल खतियान, नक्शा और दाखिल-खारिज की जांच की। सीधे टेंडर निकाल कर पिलर खड़े करवा दिए। ग्रामीणों का सीधा सवाल है - जब जमीन ही विवादित थी तो 38 करोड़ का टेंडर कैसे पास हुआ? क्या यह सरकारी मिलीभगत से जमीन हड़पने का नया तरीका है?
कानूनी पेंच और हाईकोर्ट की रोक
खुशी दो महीने भी नहीं टिकी। जुलाई 2025 में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर खोरीमहुआ के तत्कालीन एसडीएम ने निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी। भूमि के मालिकाना हक और फर्जीवाड़े से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए समन भेजा। अंचलाधिकारी, तिसरी ने चार व्यक्तियों को नोटिस देकर मूल दस्तावेज तलब किये। तब से लोहे के पिलर और ढांचे अधर में लटके हैं और जंग खा रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश, नेता प्रतिपक्ष से गुहार
निर्माण दोबारा शुरू न होने से ग्रामीणों का धैर्य टूट गया है। गुमगी पंचायत के तिसरी मंडल अध्यक्ष सुनील शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र गुप्ता, नरेश यादव सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने धनवार विधायक सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मिलकर लिखित आवेदन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासनिक स्तर पर पहल कर विवाद का समाधान कर कॉलेज का निर्माण अविलंब पूरा किया जाए, ताकि तीन प्रखंडों की बेटियों का भविष्य अंधकारमय होने से बच सके।
विभाग मौन, सवाल बरकरार
अगर विभाग ने कार्य प्रारंभ से पहले खतियान, नक्शा और 2026-27 तक की लगान रसीद की जांच की होती तो आज 38 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना पर ताला नहीं लगता। विभाग की इस घोर लापरवाही से जहां सरकार के पैसे की बर्बादी हो रही है, वहीं हजारों गरीब छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।

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