GA4-314340326 रिम्स में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, हर व्यक्ति बन सकता है गेटकीपर : प्रो. (डॉ.) मेजर अजय बाखला

रिम्स में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, हर व्यक्ति बन सकता है गेटकीपर : प्रो. (डॉ.) मेजर अजय बाखला

फोटो: रिम्स में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में शामिल प्रो. अजय बाखला और डॉ. विद्या केएल एवं अन्य। KANKE,(RANCHI)। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा गुरुवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेडिकल इंटर्न, मरीजों और परिजनों को इसके संबंध में जागरूक किया गया। इस वर्ष का थीम आत्महत्या पर बदलती सोच : चुप्पी तोड़ें, बातचीत शुरू करें हैं। मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. (डॉ.) मेजर अजय कुमार बाखला और डॉ. विद्या के.एल. ने आत्महत्या के जोखिम की पहचान, इससे जुड़े भ्रमों और खुली बातचीत के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। हर कोई बन सकता है गेटकीपर : प्रो. अजय कुमार बाखला ने कहा कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है। हर आम इंसान एक 'गेटकीपर' बन सकता है। गेटकीपर वह पहला व्यक्ति होता है जो सही समय पर समस्या को सुनता है, उस पर ध्यान देता है और किसी की जान बचाने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में हर साल 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या से जान गंवाते हैं। वहीं 15 से 29 वर्ष के युवाओं में यह मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में आत्महत्या की दर प्रति एक लाख पर 12.3 है। यह काफी चिंताजनक है। *आरक्यूपीआर मॉडल से बनें गेटकीपर: डॉक्टर अजय कुमार बाखला और डॉक्टर विद्या केएल ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए चार चीजें करना काफी अहम है। बताया कि आत्महत्या के संकट के संकेतों को पहचानना, उससे सहानुभूति के साथ सीधे बात करना और समस्या पूछना, वैसे व्यक्ति या युवक को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना काफी जरूरी है। साथ ही आवश्यकता देख कर उसको विशेषज्ञ तक पहुंचाने का कार्य करन भी अहम है। इन प्रयासों से आत्महत्या को कम करने तथा रोकने में सहायता मिलेगी। उन्होंने आत्महत्या से जुड़े मिथकों को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि आत्महत्या के बारे में पूछने से यह बढ़ती नहीं है। बल्कि इससे उसका जोखिम कम होता है। यह केवल मानसिक बीमारी से नहीं, बल्कि अत्यधिक तनाव में भी हो सकती है। अधिकांश मामलों में व्यक्ति पहले से ही चेतावनी के संकेत देता है। बताया कि रिम्स ओपीडी में सभी कार्य दिवसों पर निःशुल्क मनोरोग परामर्श उपलब्ध है। साथ ही सहायता के लिए टेली मानस के हेल्पलाइन 14416 (24x7) और rimsranchipsychiatry@gmail.com पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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