GA4-314340326 सीआईपी के पुनर्विकास के लिए उच्चस्तरीय टीम ने किया दौरा, निरीक्षण के बाद की मंत्रणा

सीआईपी के पुनर्विकास के लिए उच्चस्तरीय टीम ने किया दौरा, निरीक्षण के बाद की मंत्रणा

फोटो: सीआईपी के पुनर्विकास के लिए पहुंची उच्चस्तरीय समिति के पदाधिकारी। KANKE,(RANCHI)। केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी), कांके, रांची के प्रस्तावित पुनर्विकास को लेकर केंद्र सरकार काफी गंभीरता से जुट गई है। इसको लेकर शुक्रवार को दिल्ली से स्वास्थ्य मंत्रालय और महानिदेशालय से एक उच्चस्तरीय टीम ने संस्थान का दौरा किया। इस टीम ने ओपीडी, लाइब्रेरी, वार्ड, मेल ओटी सहित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। इसके उपरांत निदेशक डॉ वीके चौधरी एवं वरीय अधिकारियों के साथ गहन विचार विमर्श और मंत्रणा की। इसमें संस्थान में रिक्त पड़े प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मियों आदि के विभिन्न पदों को शीघ्र भरने की जरूरत बताई। ओपीडी के डिजिटलाइजेशन पर बल दिया। इस उच्चस्तरीय टीम में संयुक्त सचिव प्रभाकर (आईएएस), उप सचिव कौस्तव गिरी (आईएएस), निमहांस बैंगलोर की पूर्व निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति, संयुक्त सचिव हर्ष मंगला (आईएएस), अवर सचिव मदन लाल मीणा तथा सहायक अनुभाग अधिकारी हेमंत कौशिक शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत निदेशक डॉ. वीके चौधरी एवं टीम द्वारा किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की क्लिनिकल एवं शैक्षणिक सुविधाओं तथा वर्तमान आधारभूत संरचना का विस्तृत अवलोकन किया। दौरे के दौरान संस्थान की वर्तमान जरूरतों, प्रमुख चुनौतियों तथा प्रस्तावित पुनर्विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से रोगी देखभाल, आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण, शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण सुविधाओं, अनुसंधान, पुनर्वास तथा सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस मौके पर विभिन्न मुद्दों एवं आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श करते हुए उनके समाधान तथा संस्थान के समग्र विकास के लिए संभावित रणनीतियों पर भी चर्चा की गई। प्रस्तावित पुनर्विकास को आधुनिक, रोगी-केंद्रित, बहुविषयक एवं भविष्य की मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर विशेष बल दिया गया। इस दौरा को सीआईपी को एक सुदृढ़, आधुनिक एवं उत्कृष्ट मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने लगभग 980 करोड़ की राशि संस्थान के पुनर्विकास के लिए दिए जाने को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत संस्थान में 500 बेड का एक न्यूरो साइंसेज, न्यूरोलॉजी सहित अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाया जाएगा। वर्तमान निदेशक डॉ वीके चौधरी के विशेष पहल से इसको काफी गति मिली है और इसके धरातल पर उतरने की संभावना प्रबल हो गई है। बताते चलें लंबे समय से इसपर चर्चा होती थी, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाती थी।

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