angara(ranchi) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दौर में रचनाओं के मौलिक अधिकार और स्वामित्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शुक्रवार को उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के तत्वावधान में फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के आर्पीआर सेल के द्वारा "एआई और कॉपीराइट: रचना का स्वामित्व किसका? विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। जनरेटिव एआई और बौद्धिक संपदा अधिकारों का संघर्ष सेमिनार में वक्ताओं ने जनरेटिव एआई द्वारा तैयार की जा रही कलाकृतियों, लेखों और कंटेंट्स के लेखकत्व मौलिकता, मानवीय रचनात्मकता और कॉपीराइट संरक्षण से जुड़े जटिल कानूनी व नैतिक प्रश्नों को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल), रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिनव गुप्ता थे। अभिनव गुप्ता ने कहा कि एआई के तेजी से बढ़ते प्रसार ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने बताया कि जनरेटिव एआई के युग में यह तय करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है कि रचना का वास्तविक श्रेय मशीन को दिया जाए, उसे चलाने वाले कमांड देने वाले यूजर को या फिर उस डेटा के क्रिएटर को जिससे एआई सीखता है। विश्वविद्यालय के दिग्गजों की रही मौजूदगी इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्र के दौरान विश्वविद्यालय की प्रो-चांसलर प्रो. मधुलिका कौशिक, कुलपति प्रो. राजनी कांत, कुलसचिव डॉ. शिव प्रताप वर्मा, डीन एकेडमिक्स प्रो. बी.एन. सिन्हा और फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के डीन प्रो. राजीव रंजन सहित विधि संकाय के कई शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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