मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने की वन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा, दिए रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश
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| बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते मुख्यमंत्री। |
समीक्षा के प्रमुख बिंदु और सीएम के निर्देश
डिजिटल मैपिंग और लेयरिंग : एक क्लिक पर वन क्षेत्रों की स्थिति देखने के लिए डिजिटल मैप की लेयरिंग सुनिश्चित की जाए। वनों की कटाई, खनन क्षेत्रों के विस्तार और अभयारण्यों की सीमाओं में आए बदलावों का वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार हो।
उपयोगिता आधारित पौधारोपण : पौधरोपण केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित न हो, बल्कि स्थानीय इको-सिस्टम और ग्रामीणों की आजीविका के अनुरूप हो। महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर और तसर के लिए उपयोगी अर्जुन जैसे वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण हो।
फ्री बिजली योजना का प्रसार : नागरिकों को जोड़ने के लिए पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ (एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं) योजना का प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए।
वन पट्टा और मुआवजा : आम नागरिकों से जुड़े वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन हो। जंगली हाथियों के हमलों से मृत व्यक्तियों के आश्रितों तथा क्षतिग्रस्त फसल व घरों के मुआवजे का भुगतान तत्परता से किया जाए।
व्यावसायिक खेती पर फोकस : किसानों की आय बढ़ाने के लिए काजू और बांस (बैम्बू) की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा दिया जाए। बांस आधारित उद्योगों और बैम्बू क्राफ्ट से स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जाएं।
इको टूरिज्म का विकास : वन और पर्यटन विभाग समन्वय स्थापित कर झारखंड में इको टूरिज्म को गति दें। दुमका, जामताड़ा और कोडरमा के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से ऑनलाइन संवाद कर प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, वन सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी, और प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार आदि उपस्थित थे।

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