अमित सहाय / गिरिडीह) : जिला परिवहन कार्यालय ने बुधवार को बेंगाबाद प्रखंड परिसर में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) शिविर लगाया, जो कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। सुबह से ही कैंप में आवेदकों की भारी भीड़ उमड़ी और लंबी कतारें लगीं, लेकिन दिनभर के ड्रामे के बाद नतीजा पूरी तरह फिसड्डी रहा।
शिविर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पहुंचे युवक।
एक प्रखंड को फायदा पहुंचाने के फेर में परिवहन विभाग ने पूरे जिले का काम ठप कर दिया। आलम यह रहा कि शिविर में महज 62 लोगों ने आवेदन किया, जिनमें से सिर्फ 38 अभ्यर्थियों का ही लर्निंग लाइसेंस बन सका। वहीं दूसरी ओर, जिला मुख्यालय में स्लॉट बुक करा चुके सैकड़ों आवेदकों को बिना काम कराए बैरंग लौटना पड़ा।
एक टेबल के चक्कर में पूरे जिले का सिस्टम 'लॉक'
अधिकारियों की अदूरदर्शिता का खामियाजा पूरे गिरिडीह को भुगतना पड़ा। बेंगाबाद कैंप के लिए परिवहन कार्यालय के कंप्यूटर, कैमरे, बायोमेट्रिक मशीनें और मुख्य स्टाफ को वहां भेज दिया गया। जिला मुख्यालय में कोई वैकल्पिक व्यवस्था (Back-up System) नहीं की गई। इसके चलते गिरिडीह, गांडेय, डुमरी और बगोदर समेत अन्य प्रखंडों से स्लॉट बुक कराकर पहुंचे लोग दिनभर कार्यालय के चक्कर काटते रहे, लेकिन किसी का फोटो तक नहीं खिंच सका।
प्रचार सिर्फ तारीख का हुआ, जरूरी पेपर का नहीं
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने परिवहन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग ने सिर्फ कैंप की तारीख का ढिंढोरा पीटा, लेकिन कौन-कौन से दस्तावेज लाने हैं, इसकी सूची सार्वजनिक नहीं की। न तो पंचायत स्तर पर कोई जागरूकता अभियान चलाया गया। न ही लोगों को पहले बताया गया कि सीएचसी बेंगाबाद से स्वास्थ्य जांच (Medical Certificate) कराना अनिवार्य है। जानकारी नहीं होने से अधिकतर ग्रामीण बिना जरूरी कागजात के ही कैंप पहुंच गए, घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
कर्मी कैमरे से भागते रहे, DTO ने नहीं उठाया फोन
कैंप में मची अफरातफरी और कुप्रबंधन को लेकर जब मीडिया ने वहां मौजूद विभागीय अधिकारियों से सवाल किए, तो वे बचते नजर आए। वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य कर्मी भी कुछ भी बयान देने से कतराते रहे। इस अव्यवस्था और अफसरों की चुप्पी से आवेदकों में भारी नाराजगी देखी गई। जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
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