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| अधूरा पड़ा मनरेगा से बन रहा कुआं। |
पैसे मांगने का आरोप, काम बीच में रुका
ग्रामीण अनिल विश्वकर्मा ने सीधे आरोप लगाया कि मेठ ने काम आगे बढ़ाने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की थी। पैसे देने से मना करने के बाद से ही काम अधर में लटका दिया गया।
इस संबंध में निवर्तमान रोजगार सेवक जितेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कूप निर्माण उनके कार्यकाल में ही शुरू हुआ था और शायद कुछ राशि की निकासी भी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कितनी राशि निकाली गई। काम रुकने की वजह उन्होंने दो गोतिया के बीच जमीन विवाद को बताया।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला
मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया चौंकाने वाला रहा। मनरेगा बीपीओ पंकज कुमार ने वित्तीय अनियमितता पर सवाल पूछे जाने पर कहा कि मुझे इस योजना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वहीं, पंचायत सचिव पांडेय ने भी कहा कि "हम पंचायत में नए आए हैं, मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। आजसू नेता नारायण यादव ने अधिकारियों के बयान को हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि बीपीओ, जेई और पंचायत सचिव की मिलीभगत के बिना राशि की निकासी संभव नहीं है। कुआं देखने और ग्रामीणों की बातें सुनने से साफ है कि संवेदक और अधिकारियों ने मिलकर जनता के पैसे का गबन किया है।
सबूत मिटाने की कोशिश का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी नियमों के तहत लगाए गए योजना बोर्ड को भी सोची-समझी रणनीति के तहत तोड़ दिया गया है ताकि योजना से जुड़े विवरण छुपाए जा सकें। मौके पर सिर्फ औपचारिकता के तौर पर 2 गाड़ी पत्थर गिराए गए हैं।
धर्मेंद्र विश्वकर्मा, सचिन विश्वकर्मा, दीपक विश्वकर्मा और प्रेम विश्वकर्मा सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने बताया कि इसी तरह बरईपाट गांव में अधूरा पड़ा कुआं में गिरकर एक बच्चे की मौत हो चुकी है। उन्हें डर है कि सिंगराडीह का यह गड्ढा भी कहीं जानलेवा साबित न हो जाए।
जांच के आदेश : तिसरी के बीडीओ मनीष कुमार ने कहा कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अधूरे कूप को या तो तत्काल पूरा किया जाए या उसे सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया जाए, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

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