GA4-314340326 सिकल सेल अनुवांशिकी बिमारी, इसका इलाज प्रखंड स्तर पर संभव: सिविल सर्जन

सिकल सेल अनुवांशिकी बिमारी, इसका इलाज प्रखंड स्तर पर संभव: सिविल सर्जन

उल्लेखनीय योगदान के लिए अनगड़ा को किया गया सम्मानित
angara(ranchi)  विश्व सिकल दिवस के मौके पर पीएचसी अनगड़ा में शुक्रवार को एक दिवसीस जागरूकता सेमीनार हुआ। इसका आयोजन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएमआर) के राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान(एनआईएमआर) माडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट (एमआरएचआरयू) अनगड़ा के तत्वाधान में हुआ। इसमें सहिया, सहिया साथी, स्वास्थ्यकर्मी, को सिकल की पहचान, उपचार, रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई। सेमीनार का उदघाटन रांची के सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार ने किया। डा. प्रभात कुमार ने कहा कि सिकल सेल अनुवांशिकी बिमारी, इसका इलाज प्रखंड स्तर पर संभव है। विशेषज्ञों ने बताया कि सिकल सेल एक अनुवांसिकी रक्त विकार है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया या दरांती के आकार होता है। प्रमुख लक्षणों में खून की कमी, थकान व कमजोरी, शरीर में तेज दर्द, सांस फूलना व बच्चों के वृद्धि व विकास में देरी। इसका इलाज प्रखंड स्तर पर उपलब्ध है। रोगियों को पर्याप्त मात्रा मे पानी पीना चाहिए व पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। एमआरएचआरयू अनगड़ा के नोडल अधिकारी डा. प्रवीण कुमार त्रिपाठी, आईसीएमआर के निदेशक डॉ. अनुप कुमार अन्वीकर, सदर अपताल रांची के हेमाटोलॉजिस्ट डॉ अभिषेक रंजन ने सिकल सेल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर अनगड़ा सीएचसी को सिकल सेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. शशि प्रभा, रिम्स रांची के जेनेटिक्स एंड जीनोमिक्स विभाग के एचओडी प्रो. डा. अनुपा प्रसाद के अलावा डा. पीयूष कुमार सिंह, डा. स्वाति सिन्हा, डा. पार्वती, डा. राजेश राव, प्रतिमा लेंका, अंकुश कुमार आदि उपस्थित थे। 

Post a Comment

please do not enter any spam link in the comment box.

और नया पुराने