फोटो : रिनपास में डीटीएमएस सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर सम्बोधित करते स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी। KANKE,(RANCHI)। रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा शिक्षा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास), कांके में बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने प्रोजेक्ट मानस के तहत ब्रेन्सवे डीप ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिकस्टिमुलेशन (डीटीएमएस) सेंटर का उद्घाटन किया। यह राज्य सरकार के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में खुलने वाला पहला डीटीएमएस सेंटर है। इसका उद्देश्य राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान करना है। इस अवसर पर मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का एक अत्यंत अहम विषय है। कहा कि इस प्रकार की अत्याधुनिक तकनीकों की उपलब्धता से राज्य के मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त हो सकेगा। प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलाई ने कहा कि डीटीएमएस एक सुरक्षित, प्रभावी एवं गैर आक्रामक उपचार वाली तकनीक है, जिसका उपयोग डिप्रेशन, ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर, नशा मुक्ति उपचार तथा अन्य मानसिक एवं तंत्रिका संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र की स्थापना से झारखंड सहित पूर्वी भारत के मरीजों को अत्याधुनिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। उद्घाटन के दौरान मंत्री ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। यह परियोजना सीसीएल द्वारा अपने सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत वित्तपोषित की गई है। जबकि केंद्र की स्थापना रोटरी फाउंडेशन (इंडिया) द्वारा की गई है तथा इसमें रोटरी क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट का भी सहयोग मिला है। इस कार्यक्रम में कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा, सीसीएल के जीएम सीएसआर सिद्धार्थ शंकर लाल तथा रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट की गवर्नर रोटेरियन नम्रता, रोटरी फाउंडेशन के ललित त्रिपाठी, गौरव बागरॉय, मुकेश तनेजा , अमित अग्रवाल, योगेश गंभीर, रिनपास के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ विनोद महतो, डॉ भुवन ज्योति सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। *स्थायी निदेशक के सवाल पर घिरे मंत्री :* कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने रिनपास से जुड़े कई बुनियादी सवाल उठाये, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री घिरते दिखे। रिनपास में 20 साल से एक स्थाई निदेशक की नियुक्ति नहीं हो सकने के सवाल पर कहा कि यह पहले ही हो जाना चाहिए था। अभी इस दिशा में पहल किया जाएगा, लेकिन नियुक्ति कब तक होगी इसकी ठोस जानकारी नहीं दी। बताते चलें डॉक्टर पीके चक्रवर्ती के बाद वर्ष 2007 से आज तक संस्थान में स्थाई निदेशक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाए गए इस स्वायत्तशासी संस्थान को प्रभारी निदेशकों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए संस्थान के अधिकारों को सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि संस्थान में स्वीकृत लगभग 650 पदों में से 450 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। जबकि इन सभी पदों को भरने का अधिकार रिनपास प्रबंधकारिणी समिति तथा निदेशक को ही है। आज स्वास्थ्य विभाग और रिनपास के अधिकारी और कर्मी अपनी कमाई के लिए आधारभूत संरचना खड़ा करने पर खर्च करवा रहे हैं, जबकि पहले से बने भवनों एवं उपकरणों को संचालित करने के लिए दक्ष मानव संसाधन ही नहीं है। इधर कमाई का नया तरीका ढूंढते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी और नर्स आदि को मोटी राशि लेकर बहाल कर कमाई की जा रही है। इधर वर्तमान प्रभारी निदेशक डॉ जयति सिमलाई से स्वास्थ्य विभाग ने उनके विरुद्ध सोनू मुंडा, उत्तम कुमार आदि द्वारा दिए गए भ्रष्टाचार, अनियमितता, एसीबी कोर्ट और सीजेएम कोर्ट में चल रहे मामलों का उल्लेख करते हुए पद से हटाने की माँग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। लेकिन स्पष्टीकरण के बाद भी स्वास्थ्य विभाग इसपर चुप्पी साधे बैठा है। कुछ माह पूर्व तक कार्य कर रही सिक्योरिटी एजेंसी समानता द्वारा सुरक्षाकर्मियों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान, बोनस नहीं देने को लेकर सुरक्षाकर्मियों तथा कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष संजर खान ने कार्रवाई की मांग भी की थी। लेकिन कार्रवाई की जगह उस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद रिनपास में मैनपावर का कार्य तथा रांची सदर अस्पताल में सिक्योरिटी सेवा का कार्य देकर पुरस्कृत कर दिया गया है। इसको लेकर झामुमो के प्रखंड अध्यक्ष नवीन तिर्की ने सवाल उठाया है। रिनपास से जुड़ा यह पूरा मामला सीएम हेमंत सोरेन के संज्ञान में भी आ चुका है। ऐसे में जल्द ही ठोस कार्रवाई की संभावना बनती दिख रही है।
रिनपास में स्वास्थ्य मंत्री ने किया पहले डीटीएमएस सेंटर का उद्घाटन
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